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अपने ग्रन्थ ‘कुवलयमाला’ की रचना ई. में प्रतिहार शासक
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ओसियां में महावीर स्वामी को समर्पित जैन मंदिर का निर्माण हुआ
उत्तर
वत्सराज प्रतिहार के समय
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काव्यमीमांसा, कर्पूरमंजरी, विद्वशालभंजिका, बालरामायण, बालभारत आदि ग्रंथों की रचना की थी
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गुर्जर प्रतिहार वंश के शासक जिनके समय त्रिकोणात्मक संघर्ष प्रारम्भ हुआ
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गुर्जर प्रतिहार शासक महीपाल प्रथम की उपाधि थी
उत्तर
आर्यावर्त का महाराजाधिराज
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गुर्जर प्रतिहारों को विदेशी मानने वाला मत प्रतिपादित किया है
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ग्वालियर प्रशस्ति की रचना की थी
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नागभट्ट द्वितीय राजा के वंशज कहे जाने लगे
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नागावलोक नाम से जाना जाता है
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प्रतिहार एवं पाल शासकों पर अपनी विजय की खुशी में धु्रव ने गंगा व यमुना के चिह्नों को सम्मिलित किया
उत्तर
राष्ट्रकूट कुलचिह्न (एम्बलम) में
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प्रतिहार गुर्जर वंश के शासक जिसके समय त्रिकोणात्मक संघर्ष समाप्त हुआ
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प्रतिहार वंश का अंतिम शासक था
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प्रतिहार वंश का शासक जिसको पितृहंता कहा जाता है
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प्रतिहार वंश के शासकों की राजधानी थी
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प्रतिहार शासक जिसने सर्वप्रथम जालौर को अपनी राजधानी बनाया, वह था
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प्रतिहारों का गुरु माना जाता है
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प्रथम प्रतिहार शासक जिसने ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ की उपाधि धारण की थी
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प्रथम प्रतिहार शासक जिसने ‘परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ की उपाधि धारण की थी, वह था
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प्रभाकरवर्धन ने पराजित किया था
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प्रसिद्ध कवि राजशेखर ने अपने ग्रंथ जिसमें प्रतिहार शासक महेन्द्रपाल को ‘रघुकुल चूड़ामणि’ व ‘सूर्यवंशी क्षत्रिय’ बताया है, का नाम है
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भगवती की भक्ति के लिए प्रसिद्ध था
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मण्डौर के प्रतिहार वंश का सबसे प्रतापी शासक माना जाता है
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मण्डौर के प्रतिहार शासक जिसने भाटियों को पराजित किया था
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मानी जाती है
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मिहिरभोज को ‘इस्लाम का सबसे बड़ा शत्रु’ बताया है
उत्तर
सुलेमान (अरबयात्री) ने