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राजस्थान का इतिहास

गुर्जर-प्रतिहार वंश

56 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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1

अपने ग्रन्थ ‘कुवलयमाला’ की रचना ई. में प्रतिहार शासक

2

ओसियां में महावीर स्वामी को समर्पित जैन मंदिर का निर्माण हुआ

3

काव्यमीमांसा, कर्पूरमंजरी, विद्वशालभंजिका, बालरामायण, बालभारत आदि ग्रंथों की रचना की थी

4

गुर्जर प्रतिहार वंश के शासक जिनके समय त्रिकोणात्मक संघर्ष प्रारम्भ हुआ

5

गुर्जर प्रतिहार शासक महीपाल प्रथम की उपाधि थी

6

गुर्जर प्रतिहारों को विदेशी मानने वाला मत प्रतिपादित किया है

7

ग्वालियर प्रशस्ति की रचना की थी

8

नागभट्ट द्वितीय राजा के वंशज कहे जाने लगे

9

नागावलोक नाम से जाना जाता है

10

प्रतिहार एवं पाल शासकों पर अपनी विजय की खुशी में धु्रव ने गंगा व यमुना के चिह्नों को सम्मिलित किया

11

प्रतिहार गुर्जर वंश के शासक जिसके समय त्रिकोणात्मक संघर्ष समाप्त हुआ

12

प्रतिहार वंश का अंतिम शासक था

13

प्रतिहार वंश का शासक जिसको पितृहंता कहा जाता है

14

प्रतिहार वंश के शासकों की राजधानी थी

15

प्रतिहार शासक जिसने सर्वप्रथम जालौर को अपनी राजधानी बनाया, वह था

16

प्रतिहारों का गुरु माना जाता है

17

प्रथम प्रतिहार शासक जिसने ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ की उपाधि धारण की थी

18

प्रथम प्रतिहार शासक जिसने ‘परमभट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ की उपाधि धारण की थी, वह था

19

प्रभाकरवर्धन ने पराजित किया था

20

प्रसिद्ध कवि राजशेखर ने अपने ग्रंथ जिसमें प्रतिहार शासक महेन्द्रपाल को ‘रघुकुल चूड़ामणि’ व ‘सूर्यवंशी क्षत्रिय’ बताया है, का नाम है

21

भगवती की भक्ति के लिए प्रसिद्ध था

22

मण्डौर के प्रतिहार वंश का सबसे प्रतापी शासक माना जाता है

23

मण्डौर के प्रतिहार शासक जिसने भाटियों को पराजित किया था

24

मानी जाती है

25

मिहिरभोज को ‘इस्लाम का सबसे बड़ा शत्रु’ बताया है