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1764 अष्टधातु के दरवाजे लाकर भरतपुर के दुर्ग में लगवाये थे
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आक्रमण किया था
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चूड़ामन जाट ने अपनी राजधानी बनाया था
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जहाँगीर के काल का एशिया का प्रसिद्ध नील बाजार था
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जाटवंश का 18वीं शताब्दी के मध्य में आधिपत्य था
उत्तर
भरतपुर एवं धौलपुर भू-भागों पर
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ठाकुर चूड़ामन सिंह, जिनमें श्रेष्ठ दस्यु सम्राट (रोबर बेरन) बनने के सभी गुण मौजूद थे, वह सम्बन्धित थे
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डीग के जलमहलों का निर्माण पूरा करवाया था
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पहली बार स्वतंत्र जाट राज्य की स्थापना का श्रेय दिया जाता है
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भरतपुर की वह महान और श्रेष्ठ रानी जिसने भरतपुर राज्य के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और एक बार उसे पूर्ण विनाश से बचा लिया
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भरतपुर की ‘रानी किशोरी’ पत्नी थी
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भरतपुर के जाट राजवंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है
उत्तर
सूरजमल को में दिल्ली के लाल किले पर आक्रमण कर वहाँ से
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भरतपुर शासक बदन सिंह को जयपुर के शासक सवाई जयसिंह ने जागीर दी
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मंगलसिंह द्वारा रचित सुजान संवत विलास में प्रशंसा की गई है
उत्तर
जाट शासक महाराजा सूरजमल की
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मुगल बादशाह मुहम्मदशाह ने बदनसिंह को उपाधि प्रदान की थी
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मुगल विद्रोही जाट नेता राजाराम की हत्या की थी
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मुगलों के विरुद्ध हुए प्रथम जाट विद्रोह का नेता था
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राजाराम की मृत्यु के बाद ई. में जाट नेतृत्व की बागडोर
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वह मुगल शासक जिसके समय जाटों को घोड़ों की सवारी, बंदूक रखने तथा दुर्ग बनाने पर प्रतिबन्ध था
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सिकन्दरा में स्थित अकबर के मकबरे को लूटा था
उत्तर
जाट नेता राजाराम ने
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सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी में राजस्थान मेंं नील का कारोबार अत्यन्त विकसित था और नील हमारी सांस्कृतिक विरासत रही है और इस विरासत का गवाह रहा है
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‘जाटों का अफलातून’ या ‘जाट जाति का प्लेटो’ कहा जाता है