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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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1

अनाज पीसने की पत्थर की चक्की कहलाती है

2

अड़कणी, अणत, ओगनियौ एवं आंवला आदि है

3

आमंत्रित व्यक्ति के न आने पर उसके घर भेजा जाने वाला भोजन का थाल कहलाता है

4

कन्या के प्रथम प्रसव के बाद विदाई के समय दिया जाने वाला सामान है

5

किसी देवस्थान या देवालय के आसपास की गोचर भूमि, जहाँ लकड़ी काटना वर्जित होता है, कहलाता है

6

कुएँ की सिंचाई में एक ही नाली से भरी जाने वाली क्यारियाँ कहलाती हैं

7

खरगोश के शिकार में काम आने वाली कावड़ कहलाती है

8

गेहूँ की फसल के साथ होने वाली राई जैसी बीजों की एक घास है

9

चंद्रकला, धनक, कटारीभांत, तमोटी, औरणों औरर चिरणोटियौ हैं

10

चित्रकारी या नक्काशी के कार्य से आशय है

11

चूल्हे का आगे का वह भाग जहाँ राख एकत्रित होती है, कहलाती है

12

चूड़ीदार पायजामे के स्थान पर पहने जाने वाले वस्त्र को कहा जाता है

13

जुताई से पहले खेत में स्वत: उगने वाली कंटीली झाड़ियों व झाड़-झंखाड़ को काटने (साफ करने) की क्रिया है

14

तावडौ से आशय है

15

तीन पहियों का बच्चोंं का खिलौना जिससे वह चलना सीखता है, को कहते हैं

16

दिन का तीसरा पहर कहलाता है

17

दुल्हन को विवाह मंडप में ओढ़ाने का वस्त्र है

18

धनुष विद्या सिखाने का स्थान कहलाता है

19

पतली छाछ है

20

पश्चिमी राजस्थान में खुशी अथवा गम के अवसरों पर निकटस्थ संबंधियों एवं मित्रों के मेल मिलाप हेतु किया जाने वाला आयोजन है

21

बरसात में ओढ़ने के काम आने वाला ऊन को जमाकर बनाया गया तीन कोने वाला एक मोटा वस्त्र कहलाता है

22

माथे पर जलपात्र के नीचे रखने की कपड़े या रस्सी की गोल चकरी को कहते हैं

23

युद्ध के समय हाथी या घोड़े पर डाली जाने वाली झूल को कहते हैं

24

राजस्थान में घी में सिके आटे में गुड़/चीनी मिलाकर बनाया हुआ खाद्य पदार्थ/प्रसाद से तात्पर्य है

25

लांबी-काँचली व लालर वस्त्रों का प्रयोग करती हैं