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इब्राहिम लोदी को हराने के पश्चात् हिन्दुपत की उपाधि धारण की थी
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कर्नल जेम्स टॉड ने ‘मेवाड़ के इतिहास का मैराथन’ कहा है
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कर्नल टॉड के अनुसार बापा की मृत्यु हुई
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कीर्ति स्तम्भ के वास्तुकारों में शामिल नहीं हैं
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कुम्भलगढ़ का युद्ध हुआ
उत्तर
अप्रैल, ई. को 3 1578
231
खानवा के युद्ध में महाराणा संग्राम सिंह की सेना में शामिल नहीं था
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खानवा के युद्ध में वह राजपूत/मुस्लिम योद्धा जिन्होंने बाबर के विरुद्ध महाराणा सांगा के पक्ष में भाग लिया था
उत्तर
महमूद लोदी, रावल उदय सिंह, हसन खां मेवाती और गोकुल दास परमार
233
गिरी दुर्गों का स्वामी होने के कारण राणा कुम्भा ने उपाधि धारण किया
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चाकसू के गुहिल संबंधित हैं
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चित्तौड़ विजय के बाद अकबर ने मेवाड़ का गवर्नर बनाया
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चित्तौड़गढ़ के शासक जिसके शरीर पर घाव थे, तथा एक
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चूँडा के वंशज कहलाये
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जब महाराणा प्रताप को समझाने के लिए जून, मेंं दूसरा
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डॉ. दशरथ शर्मा ने मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्णकाल कहा है
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दुरसा आढ़ा के अनुसार महाराणा प्रताप की मृत्यु के समाचार पर आंखें नम हो गई थी
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निकाल दिया था तथा बाद में वह अलाउद्दीन खिलजी की शरण में चला गया
उत्तर
चेतन राघव में चित्तौड़ विजय के बाद अलाउद्दीन ने चित्तौड़ का नया
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फतेहसिंह सिसोदिया जो फत्ता नाम से प्रसिद्ध थे, वे सरदार थे
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बनास नदी के तट पर हुआ था
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मचान दुर्ग, भोमट दुर्ग एवं बसंती दुर्ग निर्मित है
उत्तर
महाराणा कुम्भा द्वारा
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महाराणा कुम्भा के अराध्यदेव जिनको चित्तौड़गढ़ का विजयस्तम्भ समर्पित है
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महाराणा कुम्भा ने कुम्भलगढ़ किले का निर्माण कराया था
उत्तर
कुम्भलदेवी की स्मृति में
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मालवा तथा गुजरात राज्यों के मध्य हुई
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मेवाड़ का कर्ण तथा उद्धारक कहा जाता है
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मेवाड़ की वह राजकुमारी जिसको में अमीर खाँ पिण्डारी
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मेवाड़ के सिसोदियाओं को माना जाता है