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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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226

चक्कर खाती हुई तेज चलने वाली हवा है

227

चरखे के नीचे लगी लम्बी लकड़ी को कहते हैं

228

चाँदी का आभूषण जिसे कड़े के साथ धारण करते हैं, को कहते हैं

229

जागीरदार द्वारा कृषि उपज से अपना भाग लेना और ऋण के बदले में अनाज आदि वसूल करना, कहलाता है

230

जैन साधुओं को भिक्षा या भोजन देना कहलाता है

231

तीर्थयात्रा से लौटकर करवाया जाने वाला रात्रि जागरण है

232

दूध दुहने का बर्तन कहलाता है

233

देवताओं की सवारी निकालने का पालकीनुमा वाहन कहलाता है

234

दोहों के बोल में गाया जाने वाला लोकगीत है

235

द्वितीय पत्नी को कहते हैं

236

परम्परागत राजस्थानी पहचान है

237

पीले रंग के बाँस की बनी हुई कई लड़ों वाली कंठी को कहते हैं

238

पूजा या आरती के समय बजाया जाने वाला थालीनुमा वाद्य है

239

बकरी के बालों का दरीनुमा बना मोटा वस्त्र है

240

बैठक, चौपाल और सगाई की एक रस्म है

241

बैलगाड़ी के थाटे के नीचे लगाये जाने वाला एक अवयव है

242

बड़े या विशेष भोज में सर्वप्रथम अलग होकर रखा जाने वाला भोजन का अंश कहलाता है

243

भील स्त्रियों द्वारा पहना जाने वाला अंत:वस्त्र कहलाता है

244

भीलों द्वारा सिर पर पहनी जाने वाली पगड़ी कहलाती है

245

भेड़ या बकरियों को रखने का बाड़ा कहलाता है

246

मरे हुए पशुओं का चमड़ा उतारने के स्थान को कहते हैं

247

माारवाड़ में ‘दामणी’ है

248

मुस्लिम बच्चों के मुण्डन एवं नामकरण संस्कार को कहते हैं

249

मुस्लिम शासन व्यवस्था के उस अधिकारी, जो घोड़ों के चेहरों की पहचान करता था तथा उनके सभी लक्षणों से भली-भांति परिचित था, को कहते थे

250

मृत व्यक्ति के दाह संस्कार के स्थान पर बनाया हुआ भवन या स्मारक कहलाता है