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राजस्थान में गौड़ीय सम्प्रदाय का प्रमुख मंदिर स्थित है
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राजस्थान में निर्गुणी संत संप्रदायों का आविर्भाव हुआ
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रामस्नेही संप्रदाय की एक साधना पद्धति जिसमें योग शास्त्र की परिभाषित शब्दावली का प्रयोग किया जाता है
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रामस्नेही सम्प्रदाय का चौथा रामद्वारा (पीठ) है
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रामस्नेही सम्प्रदाय की रैण शाखा के प्रवर्तक थे
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रामस्नेही सम्प्रदाय की रैण शाखा से संबंधित है
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रामानंदी संप्रदाय के ‘निहंगे साधुओं’ हेतु ‘लश्करी पीठ’ का निर्माण करवाया
उत्तर
सवाई जयसिंह (जयपुर)
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वह लोक संत जिनकी प्रमुख पीठ कतरियासर (बीकानेर) में है
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वह लोक संत जिसको पर्यावरण वैज्ञानिक के नाम से भी जाना जाता है
उत्तर
जाम्भोजी वर्ष की आयु में कतरियासर में जीवित समाधि ली थी
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वह संत जिसको राजस्थान का कबीर कहा जाता है
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वह संप्रदाय जो नाथमल एवं संतमल के मध्य की कड़ी माना जाता है
237
विश्नोई सम्प्रदाय से संबंध है
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संत दरियाव जी की समाधि है
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संत दादू की जन्म स्थली है
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संत दादूजी की वाणियों का संग्रह है
241
संत पीपा के स्मारण के रूप में बना ‘पीपावट’ का वृहत मठ स्थित है
242
संत रामदास जी द्वारा रचित ग्रंथ है
उत्तर
गुरु ग्रंथ महिमा, ग्रंथ घघर निशाणी और ग्रंथ भक्तमाल
243
सगुण भक्ति का प्रचारक संत था
244
सगुण भक्ति धारा से संबंधित नहीं है
245
सन्त दादू की मृत्यु हुई
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सुंडा माता मंदिर में स्थित भगवान शिव की मूर्ति है
उत्तर
लकुलीश सम्प्रदाय की
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‘गौरांग महाप्रभु चैतन्य’ का सम्बन्ध है
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‘जैन विश्व भारती संस्थान’ स्थित है
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‘जो पिण्ड में है वही ब्रह्माण्ड में है’ सिद्धान्त का विवेचन किया गया है
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‘निष्कलंकी’ या ‘निकलंक’ संप्रदाय का प्रवर्तक माना जाता है