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कटारा एवं पूनावाड़ा सत्याग्रह आंदोलन का सम्बन्ध है
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किसान आंदोलन के दौरान चर्चित दूधवाखारा गाँव वर्तमान में है
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कुंवर मदन सिंह द्वारा स्थापित संस्था है
उत्तर
ब्रह्मचर्याश्रम और प्रेमाश्रम अक्टूबर, को मीणाओं का विशाल सम्मेलन
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गोपेश्वर नामक स्थान जहॉँ फरवरी को भीलों की एक
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जैसलमेर रियासत में सर्वहितकारिणी वाचनालय का संचालन किया
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ठक्कर बापा के प्रयत्न से जयपुर राज्य में ‘जरायम पेशा कानून’ को समाप्त करने की घोषणा की गई
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डाबड़ा किसान आंदोलन (डीडवाना, नागौर) में मार्च
258
दूधवा खारा किसान आंदोलन का नेतृत्व किया
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नानजी पटेल व ठाकरी पटेल का संबंध है
उत्तर
बिजौलिया किसान आंदोलन से
260
नीमूचाणा आंदोलन के कर्णधार थे
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नीमूचाणा हत्याकांड में मई, को गोलियाँ चलाई गई
उत्तर
14 1925 कमाण्डर छाजूसिंह के आदेश से
262
पूर्वजों के युद्ध में बलिदान होने के उपलक्ष्य में उनके वंशजों को मिलने वाली जागीर कहलाती थी
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बारापाल व पडूना भील हत्याकांड ई. में) का सम्बन्ध
264
बिजौलिया आंदोलन का दूसरी बार प्रारंभ होने का कारण था
265
बीकानेर रियासत के (वर्तमान चुरू जिले के) दूधवाखारा व कांगड़ा गाँव के किसानों ने जागीरदारों के अत्याचार एवं शोषण के विरुद्ध आंदोलन किया
उत्तर
वैद्य मद्याराम, रघुवर दयाल एवं हनुमान सिंह आर्य के सानिध्य में
266
बेगूँ किसान आंदोलन का नेतृत्व किया
267
भीलों में धार्मिक एवं सामाजिक सुधारों से सम्बन्ध था
268
मारवाड़ हितकारिणी सभा को अवैध घोषित किया गया
269
राजस्थान का प्रथम संगठित किसान आंदोलन था
उत्तर
बिजौलिया किसान आंदोलन
270
राजस्थान में राजस्थान भूमि सुधार व जागीरों का पुर्नग्रहण अधिनियम लागू हुआ
271
राजस्थान में रियासत काल में राज्य की सेना द्वारा किसी गांव के पास पड़ाव डालने पर उसके भोजन के लिए गांव के लोगों से वसूल की जाने वाली लाग कहलाती थी
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राजस्थान में सर्वाधिक राजनीतिक जाग्रति उत्पन्न करने का श्रेय दिया जाता है
उत्तर
राजस्थान सेवा संघ को
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रूपाजी व कृपाजी किसान नेता का संबंध था
उत्तर
बेगूं किसान आंदोलन से
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वर्ष में किसानों का सूअर विरोधी आंदोलन चला था
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वह किसान आंदोलन जो ब्रिटिश हस्तक्षेप के कारण समाप्त हुआ