← सभी विषय और टॉपिक

राजस्थान का इतिहास

राजस्थान में स्वतंत्रता आंदोलन एवं जनजागरण (प्रजामण्डल, किसान एवं जनजातीय आंदोलन)

552 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

पेज 11 / 23
251

कटारा एवं पूनावाड़ा सत्याग्रह आंदोलन का सम्बन्ध है

252

किसान आंदोलन के दौरान चर्चित दूधवाखारा गाँव वर्तमान में है

253

कुंवर मदन सिंह द्वारा स्थापित संस्था है

254

गोपेश्वर नामक स्थान जहॉँ फरवरी को भीलों की एक

255

जैसलमेर रियासत में सर्वहितकारिणी वाचनालय का संचालन किया

256

ठक्कर बापा के प्रयत्न से जयपुर राज्य में ‘जरायम पेशा कानून’ को समाप्त करने की घोषणा की गई

257

डाबड़ा किसान आंदोलन (डीडवाना, नागौर) में मार्च

258

दूधवा खारा किसान आंदोलन का नेतृत्व किया

259

नानजी पटेल व ठाकरी पटेल का संबंध है

260

नीमूचाणा आंदोलन के कर्णधार थे

261

नीमूचाणा हत्याकांड में मई, को गोलियाँ चलाई गई

262

पूर्वजों के युद्ध में बलिदान होने के उपलक्ष्य में उनके वंशजों को मिलने वाली जागीर कहलाती थी

263

बारापाल व पडूना भील हत्याकांड ई. में) का सम्बन्ध

264

बिजौलिया आंदोलन का दूसरी बार प्रारंभ होने का कारण था

265

बीकानेर रियासत के (वर्तमान चुरू जिले के) दूधवाखारा व कांगड़ा गाँव के किसानों ने जागीरदारों के अत्याचार एवं शोषण के विरुद्ध आंदोलन किया

266

बेगूँ किसान आंदोलन का नेतृत्व किया

267

भीलों में धार्मिक एवं सामाजिक सुधारों से सम्बन्ध था

268

मारवाड़ हितकारिणी सभा को अवैध घोषित किया गया

269

राजस्थान का प्रथम संगठित किसान आंदोलन था

270

राजस्थान में राजस्थान भूमि सुधार व जागीरों का पुर्नग्रहण अधिनियम लागू हुआ

271

राजस्थान में रियासत काल में राज्य की सेना द्वारा किसी गांव के पास पड़ाव डालने पर उसके भोजन के लिए गांव के लोगों से वसूल की जाने वाली लाग कहलाती थी

272

राजस्थान में सर्वाधिक राजनीतिक जाग्रति उत्पन्न करने का श्रेय दिया जाता है

273

रूपाजी व कृपाजी किसान नेता का संबंध था

274

वर्ष में किसानों का सूअर विरोधी आंदोलन चला था

275

वह किसान आंदोलन जो ब्रिटिश हस्तक्षेप के कारण समाप्त हुआ