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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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251

राजा, सामंत, जागीरदार, भू-स्वामियों द्वारा किसानों से वसूल किया जाने वाला उपज का कुल निश्चित भाग कहलाता है

252

रोगी को दिया जाने वाला बाजरी के आटे का तरल पदार्थ कहलाता है

253

वस्त्र की वह तकनीक जिसमें बांधकर रंग को रोका जाता है

254

विवाह की रस्म जो विवाह मण्डप में कन्या के भाई या मामा द्वारा वर के सामने ‘सरवा’ घुमाकर अदा की जाती है, कहलाती है

255

विवाह के पश्चात् दूल्हे के घर जाकर की जाने वाली मिलनी कहलाती है

256

विवाह में चतुर्थ फेरे के बाद वर द्वारा वधू के दाहिने कंधे पर हाथ रखकर वेदी के उत्तर की तरफ ईशान कोण में एक-एक पद आगे बढ़ाने की क्रिया को कहा जाता है

257

शनिदेव की पूजा करने वाला ब्राह्मण कहलाता है

258

शीतला का त्यौहार और उस दिन खाया जाने वाला ठंडा भोजन है

259

शीतला देवी को भेंट धरने के लिए एक दिन पहले बना हुआ बासी भोजन कहलाता है

260

सरकार की ओर से किसानों को दिया जाने वाला ऋण कहलाता है

261

सुनार व बढ़ई का एक औजार है

262

स्त्रियों के पैरों की पायल और एक सूती वस्त्र है

263

अनाज को छाज में डालकर साफ करने की क्रिया को कहते हैं

264

कुएँ से सिंचाई हेतु पानी निकालने का चमड़े का बना पात्र है

265

खेल-तमाशा दिखाकर जीवन निर्वाह करने वाली जाति का व्यक्ति कहलाता है

266

गरासिया पुरुष ‘भाटली’ नामक आभूषण पहनते हैं

267

घाणी (कोल्हू) की लाठ को रोक रखने के लिए लगाई जाने वाली लकड़ी है

268

घोड़ों के व्यापारी को कहते हैं

269

चोप नामक आभूषण पहना जाता है

270

जागीरदार द्वारा अपना हिस्सा लेने के पश्चात् कृषक के लिए खलिहान में बची हुई अनाज की राशि कहलाती है

271

ढोल से मिलता-जुलता वाद्य है

272

तीर्थ स्थानों में अस्थित विसर्जन करना कहलाता है

273

दही मंथन का एक पात्र है

274

दीपक की लौ से काजल बनाने की मिट्टी का बना उपकरण कहलाता है

275

दूध देना बंद कर देने की अवस्था वाली गाय/भैंस को कहते हैं