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राजा, सामंत, जागीरदार, भू-स्वामियों द्वारा किसानों से वसूल किया जाने वाला उपज का कुल निश्चित भाग कहलाता है
252
रोगी को दिया जाने वाला बाजरी के आटे का तरल पदार्थ कहलाता है
253
वस्त्र की वह तकनीक जिसमें बांधकर रंग को रोका जाता है
254
विवाह की रस्म जो विवाह मण्डप में कन्या के भाई या मामा द्वारा वर के सामने ‘सरवा’ घुमाकर अदा की जाती है, कहलाती है
255
विवाह के पश्चात् दूल्हे के घर जाकर की जाने वाली मिलनी कहलाती है
256
विवाह में चतुर्थ फेरे के बाद वर द्वारा वधू के दाहिने कंधे पर हाथ रखकर वेदी के उत्तर की तरफ ईशान कोण में एक-एक पद आगे बढ़ाने की क्रिया को कहा जाता है
257
शनिदेव की पूजा करने वाला ब्राह्मण कहलाता है
258
शीतला का त्यौहार और उस दिन खाया जाने वाला ठंडा भोजन है
259
शीतला देवी को भेंट धरने के लिए एक दिन पहले बना हुआ बासी भोजन कहलाता है
260
सरकार की ओर से किसानों को दिया जाने वाला ऋण कहलाता है
261
सुनार व बढ़ई का एक औजार है
262
स्त्रियों के पैरों की पायल और एक सूती वस्त्र है
263
अनाज को छाज में डालकर साफ करने की क्रिया को कहते हैं
264
कुएँ से सिंचाई हेतु पानी निकालने का चमड़े का बना पात्र है
265
खेल-तमाशा दिखाकर जीवन निर्वाह करने वाली जाति का व्यक्ति कहलाता है
266
गरासिया पुरुष ‘भाटली’ नामक आभूषण पहनते हैं
267
घाणी (कोल्हू) की लाठ को रोक रखने के लिए लगाई जाने वाली लकड़ी है
268
घोड़ों के व्यापारी को कहते हैं
269
चोप नामक आभूषण पहना जाता है
270
जागीरदार द्वारा अपना हिस्सा लेने के पश्चात् कृषक के लिए खलिहान में बची हुई अनाज की राशि कहलाती है
271
ढोल से मिलता-जुलता वाद्य है
272
तीर्थ स्थानों में अस्थित विसर्जन करना कहलाता है
273
दही मंथन का एक पात्र है
274
दीपक की लौ से काजल बनाने की मिट्टी का बना उपकरण कहलाता है
275
दूध देना बंद कर देने की अवस्था वाली गाय/भैंस को कहते हैं