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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान : लोक देवता, लोक देवियाँ, संत एवं सम्प्रदाय

269 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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‘पूर्णप्रज्ञ भाष्य’ की रचना कर ‘द्वैतवाद’ का प्रतिपादन किया

252

‘फतै-फतै’ शब्द का उच्चारण करते हुए अंगारों पर अग्नि नृत्य किया जाता है

253

‘ब्रह्म सम्प्रदाय’ और ‘परब्रह्म सम्प्रदाय’ नाम हैं

254

‘मंत्र राज प्रकाश’ तथा ‘हरिपुरुष जी की वाणी’ संग्रह है

255

‘सन्यासियों के सुल्तान’ के उपनाम से जाना जाता है

256

कटे हुए कान तथा जटा, परिचयात्मक प्रतीक होते हैं

257

कपिलमुनि की तपोभूमि श्री कोलायत जी स्थित है

258

गद्दी है

259

जसनाथी सिद्धों की समाधियाँ कहलाती हैं

260

पर्यावरण सुरक्षा हेतु प्राणों तक का बलिदान कर देने के लिए प्रसिद्ध है

261

बीकानेर का वह तीर्थ स्थल जहाँ पर सिक्ख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव पधारे थे

262

मीरा बाई का जन्म स्थान है

263

राजस्थान के प्रसिद्ध संत जो बीकानेर में कतरियासर से संबंधित हैं

264

वह सूफी संत जिसने नागौर के पास ‘सुवाल’ गाँव में अपना केन्द्र बनाकर शांतिपूर्वक प्रचार किया

265

विश्नोई सम्प्रदाय के संस्थापक हैं

266

वैष्णवों के आराध्य देव गोकुलचन्द्रजी का प्रसिद्ध मंदिर है

267

संत पीपाजी का जन्म स्थान है

268

सहजोबाई का गुरु था

269

‘निम्बार्क’ सम्प्रदाय की मुख्य पीठ है