पेज 12 / 14
276
अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ आक्रमण का मुख्य कारण था
उत्तर
रानी पद्मिनी को प्राप्त करना
277
इश्कचमन, मनोरथ मंजरी, नागर समुच्चय, रसिक रत्नावली, विहार चन्द्रिका आदि ग्रन्थों की रचना की थी
278
कर्नल टॉड ने ‘मेवाड़ की थर्मोपल्ली’ की संज्ञा दी
उत्तर
हल्दीघाटी के युद्ध को
279
कीर्ति स्तंभ को ‘पौराणिक देवताओं का अमूल्य कोष’ कहा है
280
गुहिलों की ब्राह्मण उत्पत्ति के सिद्धान्त के विरुद्ध हैं
281
चित्तौड़ का दुर्ग सामरिक महत्व का था, इसलिए चित्तौड़ पर आक्रमण किया
282
चित्तौड़ किले का पहला जौहर हुआ
उत्तर
पद्मिनी के नेतृत्व में
283
चित्तौड़ के दुर्ग में सात द्वारों का निर्माण करवाया था
284
डाकन प्रथा को गैरकानूनी घोषित करने वाले मेवाड़ भील कोर संघ के अंग्रेज कमाण्डेंट थे
285
दिल्ली के सुल्तान जिसको गुहिल शासक जैत्रसिंह ने पराजित किया था
286
दिवेर नामक मुगल थाने का प्रभारी अकबर ने नियुक्त किया था
287
नये जागीरदार के गद्दीनसीनी के समय उत्तराधिकार के रूप में राज्य द्वारा लिया जाने वाला उत्तराधिकारी शुल्क था
288
प्रथम बार ‘हल्दीघाटी के युद्ध’ शब्द का प्रयोग किया
289
प्रसिद्ध विद्वान योगेश्वर व भट्ट विष्णु दरबारी थे
290
भगवान विष्णु को समर्पित है
291
महाराणा कुंभा द्वारा निर्मित विजय स्तंभ जिसको ‘रोम की टॉर्जन कृति’ कहा है
292
महाराणा भीमसिंह के समय उदयपुर का पोलिटिकल एजेन्ट नियुक्त किया गया
293
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान का प्रतीक चिह्न है
294
मुगलों से संधि करने वाला मेवाड़ का प्रथम शासक था
उत्तर
महाराणा अमरसिंह प्रथम
295
मेवाड़ और आमेर रियासतों के मध्य हुआ था
296
मेवाड़ में युद्ध के समय वसूल किया जाने वाला कर था
297
राजस्थान के प्रसिद्ध इतिहासकार जो एक समाज सुधारक भी थे और जिन्होंने महाराणा कुम्भा की जीवनी भी लिखी थी
298
वह इतिहासकार जिसने हल्दीघाटी के युद्ध को ‘अनिर्णीत युद्ध’ की संज्ञा दी है
299
वह किला जिसको जीतने के क्रम में अकबर को जयमल एवं फत्ता के प्रबल प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था
300
वह फारसी विद्वान जो चित्तौड़ विजय के समय अलाउद्दीन खिलजी के साथ था