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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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276

दूल्हे-दुल्हन के कान पर व सिर पर बाँधने का सेहरा कहलाता है

277

पाणिग्रहण से पूर्व वर की ओर से वधू को पहनाई जाने वाली चाँदी की मुद्रिका कहलाती है

278

पुरुष व स्त्रियों द्वारा गले में पहना जाने वाला मुख्य आभूषण है

279

फसल रक्षार्थ पशु-पक्षियों को डराने हेतु खेत में खड़ा किया जाने वाला मानव आकृति का पुतला कहलाता है

280

बागी, डाकू, उपद्रवी से आशय है

281

बाजार या मंडी में अनाज आदि का बोझा ढोने वाला मजदूर कहलाता है

282

बारात प्रस्थान से पूर्व की जाने वाली गणेश पूजा को कहते हैं

283

ब्याज पर रुपया उधार देने का धंधा कहलाता है

284

भूमि के स्वामित्व का अधिकार पत्र कहलाता है

285

मवेशियों के आगे चरने का चारा डालना कहलाता है

286

मांगलिक अवसर पर प्रयुक्त चावल या गेहूँ के दाने को कहते हैं

287

माल ढोने या कृषि कार्य के बैलों का समूह है

288

मोर, पगपान व फोलरी पर्याय हैं

289

रांधणा-सीधणां है

290

राजस्थान के संदर्भ में ‘पीला पोमचा’ है

291

राजस्थान में प्रचलित सुरलिया आभूषण पहना जाता है

292

राजस्थान में मल्लाह को कहते हैं

293

लकड़ी या लोहे में छेद करने का औजार है

294

लुहार की भट्टी को कहते हैं

295

वंशावली पढ़ने-लिखने का काम करने वाली एक प्रकार की जाति है

296

वह स्थान जहाँ नि:शुल्क भोजन व आवास की व्यवस्था हो

297

विवाह के समय वधू के लिए बनाई गई विशिष्ट पोशाक है

298

विवाह मंडप में अग्नि परिक्रमा के पश्चात् कन्या को पहनाई जाने वाली पोशाक को कहते हैं

299

विवाहित पति को छोड़कर दूसरे की पत्नी बनने वाली स्त्री कहलाती है

300

शराब का व्यवसाय करने वाला कहलाता है