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301
शेरशाह ने चित्तौड़ का गवर्नर नियुक्त किया
302
हल्दीघाटी के युद्ध का आँखों देखा वृतान्त लिखा गया है
उत्तर
अब्दुल कादिर बदायूँनी द्वारा
303
हल्दीघाटी के युद्ध में हाथियों के युद्ध का वर्णन किया था
उत्तर
बदायूँनी और अबुल फजल ने
304
‘गीत-गोविन्द’ की टीका जो महाराणा कुम्भा द्वारा रचित है
305
‘जो दृढ़ राखै धर्म को तिहिं राखै करतार’ शब्द अंकित थे
उत्तर
मेवाड़ के राज चिह्न में
306
‘यह दुर्ग इतनी बुलन्दी पर बना हुआ है कि नीचे से ऊपर की ओर देखने पर सिर की पगड़ी गिर जाती है’ अबुल फजल ने यह कथन कहा था
उत्तर
कुम्भलगढ़ दुर्ग के लिए
307
अकबर हल्दीघाटी के युद्ध के लिए सर्वप्रथम राजस्थान में आया था
308
आबू का वह परमार राजा जो परमारों का मरुमण्डल का महाराज कहलाता था
309
कविराज श्यामलदास ने गुहिलों को मूलत: माना है
310
कुंभा के प्रमुख शिल्पी मंडन द्वारा अपने ग्रंथ रूपावतार मंडन को विभक्त किया गया है
311
कुम्भा ने अपना प्रथम विजय अभियान प्रारम्भ किया
312
कुशालमाता का भव्य मन्दिर जिसका निर्माण महाराणा कुम्भा ने करवाया, स्थित है
313
गुहिल शासक रणसिंह के पुत्र क्षेमसिंह ई.) ने जन्म
314
घासुण्डी की बावड़ी का निर्माण करवाया
315
चूँडा की मृत्यु के उपरान्त मारवाड़ का शासक बना
316
चेतक का चबूतरा स्थित है
उत्तर
बलीचा गाँव (राजसमंद)
317
जहाँगीर ने शासक बनने के उपरान्त मेवाड़ पर प्रथम मुगल अभियान भेजा था
उत्तर
परवेज आसिफ खां एवं जफरबेग के नेतृत्व में
318
जैत्रसिंह द्वारा पराजित शासक था
319
डॉ. उपेन्द्रनाथ डे ने कीर्ति स्तम्भ को बताया है
320
त्यागी वीर पुरुष भामाशाह समर्पित थे
उत्तर
महाराणा प्रताप के प्रति
321
पिछोला झील में जगतनिवास महल का निर्माण करवाया था
उत्तर
मेवाड़ शासक महाराणा जगतसिंह द्वितीय
322
प्रताप की खम्भों की छतरी निर्मित है
323
भामाशाह द्वारा अपनी समस्त सम्पत्ति प्रताप को अर्पित की गई थी
उत्तर
चूलिया नामक स्थान पर
324
महपा पँवार के समय मेवाड़ का शासक था
325
महमूद खिलजी ने मेवाड़ पर अन्तिम आक्रमण किया था