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राजस्थान का इतिहास

गुहिल वंश का इतिहास

345 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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301

शेरशाह ने चित्तौड़ का गवर्नर नियुक्त किया

302

हल्दीघाटी के युद्ध का आँखों देखा वृतान्त लिखा गया है

303

हल्दीघाटी के युद्ध में हाथियों के युद्ध का वर्णन किया था

304

‘गीत-गोविन्द’ की टीका जो महाराणा कुम्भा द्वारा रचित है

305

‘जो दृढ़ राखै धर्म को तिहिं राखै करतार’ शब्द अंकित थे

306

‘यह दुर्ग इतनी बुलन्दी पर बना हुआ है कि नीचे से ऊपर की ओर देखने पर सिर की पगड़ी गिर जाती है’ अबुल फजल ने यह कथन कहा था

307

अकबर हल्दीघाटी के युद्ध के लिए सर्वप्रथम राजस्थान में आया था

308

आबू का वह परमार राजा जो परमारों का मरुमण्डल का महाराज कहलाता था

309

कविराज श्यामलदास ने गुहिलों को मूलत: माना है

310

कुंभा के प्रमुख शिल्पी मंडन द्वारा अपने ग्रंथ रूपावतार मंडन को विभक्त किया गया है

311

कुम्भा ने अपना प्रथम विजय अभियान प्रारम्भ किया

312

कुशालमाता का भव्य मन्दिर जिसका निर्माण महाराणा कुम्भा ने करवाया, स्थित है

313

गुहिल शासक रणसिंह के पुत्र क्षेमसिंह ई.) ने जन्म

314

घासुण्डी की बावड़ी का निर्माण करवाया

315

चूँडा की मृत्यु के उपरान्त मारवाड़ का शासक बना

316

चेतक का चबूतरा स्थित है

317

जहाँगीर ने शासक बनने के उपरान्त मेवाड़ पर प्रथम मुगल अभियान भेजा था

318

जैत्रसिंह द्वारा पराजित शासक था

319

डॉ. उपेन्द्रनाथ डे ने कीर्ति स्तम्भ को बताया है

320

त्यागी वीर पुरुष भामाशाह समर्पित थे

321

पिछोला झील में जगतनिवास महल का निर्माण करवाया था

322

प्रताप की खम्भों की छतरी निर्मित है

323

भामाशाह द्वारा अपनी समस्त सम्पत्ति प्रताप को अर्पित की गई थी

324

महपा पँवार के समय मेवाड़ का शासक था

325

महमूद खिलजी ने मेवाड़ पर अन्तिम आक्रमण किया था