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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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301

शस्त्रों की धार तेज करने का एक चक्राकार उपकरण है

302

सूर्यास्त के पूर्व के भोजन को कहते हैं

303

हथियारों का सान चढ़ाने का पत्थर है

304

हार आभूषण का एक रूप है

305

हिन्दुओंं का ऐसा राजा जो हिन्दू समाज, संस्कृति व धर्म का रक्षक हो, उसे कहते हैं

306

होली के दिनों में हाथा से डंडे बजाते हुए किया जाने वाला नृत्य कहलाता है

307

‘रखन’ आभूषण है

308

अनाज को हवा में उछालकर साफ करने की प्रक्रिया कहलाती है

309

अनावश्यक पानी निकालने की मोरी को कहते हैं

310

अपने यजमानों की पीढ़ियों का वृतान्त लिखने वाले व्यक्ति को कहते हैं

311

आंख की पलकों पर होने वाली फुंसी को कहते हैं

312

कलाई में पहनने वाला आभूषण है

313

कान के ऊपरी हिस्से में छेद करके पहने जाने वाला आभूषण है

314

किसी लोक देवता को कष्ट निवारणार्थ अर्पण की जाने वाली कपड़े की धज्जी कहलाती है

315

कृषि भूमि पर लिया जाने वाला लगान कहलाता है

316

खरीफ की फसल के साथ उत्पन्न होने वाला एक रेंगने वाला कीड़ा, जो फसल को हानि पहुँचाता है, कहलाता है

317

खेत की भूमि को बार-बार जोतकर बीज बोने योग्य बनाने की क्रिया कहलाती है

318

खेत में फसल की सुरक्षार्थ एवं पशु-पक्षियों को डराने के लिए खड़े किये जाने वाले पुतले को कहते हैं

319

गणगौर का एक गीत तथा इस गीत के साथ दीप रखकर घुमाया जाने वाला एक छोटा घड़ा है

320

गले में पहनने वाला आभूषण है

321

चैत्र कृष्णा प्रतिपदा से सप्तकी तक मनाया जाने वाला एक लोक प्रसिद्ध पर्व है

322

ज्वार की फसल का एक रोग है

323

टेवौ से आशय है

324

दो सींगों वाला एक कृषि उपकरण है

325

निंबोली, निगोदर, पचममाणियौ इत्यादि स्त्रियों के आभूषण हैं