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महाराणा अमरसिंह और खुर्रम के बीच संधि हुई
327
महाराणा राजसिंह का चारूमति से विवाह का उल्लेख किया गया है
उत्तर
त्रिमुखी बावड़ी की प्रशस्ति में
328
महाराणा सांगा के समकालीन मुजफ्फरशाह द्वितीय शासक था
329
मारवाड़ के सामन्त मुख्यत: विभाजित थे
330
मेवाड़ के महाराणा कुंभा की पुत्री जो प्रसिद्ध संगीतज्ञ, गायन व वादन मेंं निपुण तथा वागीश्वरी उपनाम से प्रसिद्ध थी, का नाम है
331
राजपूताना की रियासतों में ब्रिटिश सरकार से सर्वाधिक विरोध रहा
332
राणा प्रताप को नतमस्तक करने के लिए लड़ा गया था
333
राणा सांगा के द्वारा लड़े गये युद्धों का क्रम है
उत्तर
खातौली का युद्ध 1. धौलपुर का युद्ध 2. गागरोन का युद्ध 3. बयाना का युद्ध 4.
334
राव गांगा के समय मारवाड़ व नागौर के मध्य युद्ध लड़ा गया
उत्तर
सेवकी गाँव का युद्ध
335
रावल रतनसिंह के शासनकाल की प्रमुख घटना थी
उत्तर
चित्तौड़ का प्रथम शाका
336
वह युद्ध जिसमें महाराणा सांगा पराजित हुए थे
337
वह राजपूत रानी जिसने हुमायूं के पास राखी भेजकर बहादुरशाह के खिलाफ सहायता का सन्देश भेजा
338
वह राजा जिसके साथ भोजन करना राणा प्रताप ने स्वीकार नहीं किया
339
वह रियासत जिसको औरंगजेब ने शासक बनते ही मेवाड़ में नहीं मिलाया था
340
वह वंश जिसने 8वीं शताब्दी से 13वीं शताब्दी तक आबू, जालौर, बागड़, चन्द्रावती, किराडू तथा अर्थूणा में अपने राज्य स्थापित किए
341
वह शासक जिसने चन्देरी के युद्ध को ‘जिहाद’ घोषित किया और युद्धोपरान्त राजपूतों के सिरों की मीनार बनवाई
342
वह शिलालेख जिससे ज्ञात होता है कि मेवाड़ में अमात्य, सन्धिविग्रहिक, अक्षयपाटलिक, वंदिपति, भिषगाधिराज मंत्रिमण्डल के सदस्य थे
उत्तर
सारणेश्वर शिलालेख के मानगढ़ हत्याकाण्ड के समय बाँसवाड़ा के शासक थे
343
शाहजहाँ ने राजसिंह द्वारा चित्तौड़ दुर्ग में करवाये जा रहे निर्माण कार्य को तोड़ने के लिए भेजा
344
सांस्कृतिक दृष्टि से वह महाराणा जिनका काल मेवाड़ के इतिहास का स्वर्ण युग कहलाता है
345
‘राजस्थान का भीष्म पितामह’ कहा जाता है