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नीची जमीन वाला खेत, जिसमें वर्षा का पानी एकत्रित होता हो, को कहते हैं
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परात में छाछ भरकर उसमें चाँदी का छल्ला डालकर वर-वधू को खिलाया जाने वाला खेल है
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पाँव के अँगूठे में पहने जाने वाला आभूषण है
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पानी में छानने का वस्त्र है
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पासे फेंककर भविष्य बताने की विद्या कहलाती है
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फसल कटने के बाद मवेशियों को खेत में मिलने वाला घास सहित फसल का अवशिष्ट भाग कहलाता है
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फसल पकने के बाद किसान द्वारा उसे काटने की क्रिया है
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बाजू में पहनने वालाा आभूषण है
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भविष्य के लिए सुरक्षित कर रखने का अच्छा चारा और खर्च की पूर्ति के लिए लिया जाने वाला कर है
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मधुमक्खियों का छत्ता है
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मुरकी, मेखला, मेमंद, लटकण, सरकौ आदि हैं
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मैदे में घी-शक्कर मिलाकर बनाई जाने वाली रोटी कहलाती है
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राजस्थान में महिलाएँ सौभाग्य सूचक के प्रतीक में प्रयोग में लाती हैं
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वधू के मामा की ओर से दी जाने वाली पोशाक विशेष कहलाती है
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वह नीची भूमि जिसमें वर्षा का पानी इकट्ठा होने से गेहूँ और चने की फसल ली जाती है, कहलाती है
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विवाह में पुत्री की विदाई पर गाया जाने वाला एक लोकगीत है
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सबसे पहले बोई हुई फसल कहलाती है
343
समधिन से आशय है
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सिर का आभूषण है
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सोने-चाँदी के तारों परर खुदाई करने का उपकरण कहलाता है
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स्वर्णकारों का पीतल का बना साँचा, जिसमें तारों की विभिन्न डिजाइनें खुदी रहती हैं, कहलाता है
347
हुक्के का एक भाग और लाठी है
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‘जवलियौ’ और ‘जेलड़’ नामक आभूषणों काा प्रयोग किया जाता है
349
अनुष्ठान या पूजन के प्रारम्भ में दाहिनी हथेली से जलपान कहलाता है
350
काटना, काटा जाना और भेड़ों की ऊन उतारना से आशय है