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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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326

नीची जमीन वाला खेत, जिसमें वर्षा का पानी एकत्रित होता हो, को कहते हैं

327

परात में छाछ भरकर उसमें चाँदी का छल्ला डालकर वर-वधू को खिलाया जाने वाला खेल है

328

पाँव के अँगूठे में पहने जाने वाला आभूषण है

329

पानी में छानने का वस्त्र है

330

पासे फेंककर भविष्य बताने की विद्या कहलाती है

331

फसल कटने के बाद मवेशियों को खेत में मिलने वाला घास सहित फसल का अवशिष्ट भाग कहलाता है

332

फसल पकने के बाद किसान द्वारा उसे काटने की क्रिया है

333

बाजू में पहनने वालाा आभूषण है

334

भविष्य के लिए सुरक्षित कर रखने का अच्छा चारा और खर्च की पूर्ति के लिए लिया जाने वाला कर है

335

मधुमक्खियों का छत्ता है

336

मुरकी, मेखला, मेमंद, लटकण, सरकौ आदि हैं

337

मैदे में घी-शक्कर मिलाकर बनाई जाने वाली रोटी कहलाती है

338

राजस्थान में महिलाएँ सौभाग्य सूचक के प्रतीक में प्रयोग में लाती हैं

339

वधू के मामा की ओर से दी जाने वाली पोशाक विशेष कहलाती है

340

वह नीची भूमि जिसमें वर्षा का पानी इकट्ठा होने से गेहूँ और चने की फसल ली जाती है, कहलाती है

341

विवाह में पुत्री की विदाई पर गाया जाने वाला एक लोकगीत है

342

सबसे पहले बोई हुई फसल कहलाती है

343

समधिन से आशय है

344

सिर का आभूषण है

345

सोने-चाँदी के तारों परर खुदाई करने का उपकरण कहलाता है

346

स्वर्णकारों का पीतल का बना साँचा, जिसमें तारों की विभिन्न डिजाइनें खुदी रहती हैं, कहलाता है

347

हुक्के का एक भाग और लाठी है

348

‘जवलियौ’ और ‘जेलड़’ नामक आभूषणों काा प्रयोग किया जाता है

349

अनुष्ठान या पूजन के प्रारम्भ में दाहिनी हथेली से जलपान कहलाता है

350

काटना, काटा जाना और भेड़ों की ऊन उतारना से आशय है