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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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351

किसान द्वारा भू-स्वामी की स्वीकृति से खलिहान में से लगान चुकाने के पूर्व खाने के लिए ले जाया जाने वाला अनाज कहलाता है

352

किसी वीर की कीर्ति को चिरस्थाई रखने का लोकगीत है

353

खंजरी के आकार का एक वाद्य है

354

घोड़ों का एक रोग है

355

चाँदी के तारों का पाँव का आभूषण विशेष है

356

चुनाई मेंं दो भागों को जोड़ने के लिए बीच में लगाया जाने वाला पदार्थ है

357

छोटे-छोटे बादलों से होने वाली हल्की-हल्की छाया को कहते हैं

358

जलाशय के आसपास की पड़ती भूमि, जिसके वृक्षादि नहीं काटे जाते हैं, को कहते हैं

359

जीरे की फसल का एक रोग है

360

टड्डा है

361

तिलक लगाने की एक लाल बुकनी और गेहूँ की फसल का रोग है

362

तीज के पर्व पर लड़की के पिता द्वारा उसके ससुराल भेजी जाने वाली मिठाई है

363

दही बिलौने के बाद जिस पात्र मेंं अलूणा (घी) रखते हैं, उसे कहते हैं

364

दूध अथवा गर्म लेह पदार्थ के ठण्डा होने पर उसके ऊपर जमने वाली मोटी परत है

365

धूल या कीचड़ में लथपथ करना कहलाता है

366

नगजड़ित स्त्रियों की कलाई का चौड़ा पट्टीनुमा आभूषण है

367

नमूने के लिए अनाज के दाने निकालने के काम आता है, उसे कहते हैं

368

पानी आदि तरल पदार्थ की जमीन पर बहने वाली छोटी धार को कहते हैं

369

पानी लाने के लिए गाड़ी पर रखे जल पात्रों का समूह है

370

पुरुषों के कान का आभूषण है

371

बंदूक द्वारा निशाना साधने का अभ्यास कहलाता है

372

बोरला (सिर), टोकली (कान) और खुंगारी (गला) आभूषण संबंधित है

373

भेड़-बकरी व ऊँटोें का पालन तथा व्यवसाय करने वाली एक जाति है

374

मृतक का क्रिया कर्म या मृतक भोजन कहलाता है

375

मोचियों का एक औजार विशेष है