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401
गिरवी रहने की क्रिया को कहते हैं
402
घाघरे के स्थान पर पहना जाने वाला छपा हुआ वस्त्र है
403
जैन समुदाय में शरीर त्याग हेतु स्वेच्छा से किया जाने वाला अन्न-जल का त्याग कहलाता है
404
दरियाई नारियल का संपुटनुमा भिक्षापात्र है
405
दीवार की सतह नापने का लकड़ी का एक उपकरण है
406
दुल्हन द्वारा पहने जाने वाली लाख की चूड़ी को कहते हैं
407
दुष्काल पड़ने पर अन्य प्रदेश में मवेशियों के साथ गमन या ऐसा स्थान जहाँ मवेशी सहित ठहरा जाता हो, कहलाता है
408
पशुओं के क्रय-विक्रय के लिए लगाई गई अस्थायी हाट है
409
पुत्र जन्मोत्सव पर गाया जाने वाला लोकगीत कहलाता है
410
पुरुषों के गले में धारण करने का सोने व चाँदी से निर्मित आभूषण कहलाता है
411
पुरुषों द्वारा का में पहने जाने वाले जेवर का स्थानीय नाम है
412
पौधे का कटने के बाद पीछे रहने वाला भाग है
413
फेरी लगाकर सौदा बेचने वाले व्यापारी को कहते हैं
414
बलिदान या सती होने के लिए जुझार या सती के द्वारा दीवार पर कुमकुम से हाथ का लगाया हुआ छापा कहलाता है
415
मटकी आदि में पानी लेने का डंडी वाला पात्र है
416
मरे हुए गाय, बैल का साफ किया हुआ आधा चमड़ा कहलाता है
417
महिलायें ‘नथ’ धारण करती हैं
418
मेवात क्षेत्र में प्रचलित कंठ के आभूषण को कहते हैं
419
यज्ञ कुण्ड में आहुति देने का लकड़ी का कलछा है
420
लाव-चड़स खींचने हेतु बैलों के चलने का ढलाननुमा स्थान है
421
लोकप्रिय आभूषण ‘तगड़ी’ पहना जाता है
422
वर पक्ष द्वारा किया जाने वाला प्रीतिभोज कहलाता है
423
वर्षा के अभाव में कुएँ के पानी से की जाने वाली साधारणा सिंचाई को कहते हैं
424
वस्त्र के टुकड़ों का बना चोगा और जैन साध्वियों के वस्त्र से आशय है
425
वह ऊँट जिस पर पलाण कसा हुआ न हो