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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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426

शारीरिक कष्ट की मुक्ति हेतु देवता के नाम से बाँधा जाने वाला कच्चे सूत का धागा है

427

शीतल वायु की लहर को कहते हैं

428

श्वेताम्बर जैन साधुओं व धर्मानुयायियों द्वारा सामायिक (तप या ध्यान) करते समय मुँह पर बाँधी जाने वाली सफेद पट्टी है

429

संध्या के समय गाये जाने वाले मांगलिक लोकगीत को कहते हैं

430

साधु संतों का कमण्ल है

431

सेवण, सोंवाौ, सोयलौ आदि हैं

432

स्त्रियों का एक वस्त्र व आभूषण है

433

हाथ से बुना हुआ मोटा कपड़ा और सुनारों का एक उपकरण है

434

होली के दसवें दिन किया जाने वाला एक व्रत है

435

कन्या की विदाई, गौना, दहेज का सामान और प्रथम प्रसव के बाद कन्या को दिया जाने वाला सामान व विदाई से आशय है

436

कपड़ों पर कलाबूंती का कार्य करने वाला कारीगर है

437

काष्ठ या धातु निर्मित पाात्र, जिसमें मिर्च-मसाले रखने के खाने बने होते हैं

438

कुएँ पर लगा रहने वाला काष्ठ का गोल चक्र है

439

कुम्हार का मिट्टी के बर्तन बनाने का मोटे पत्थर का चक्र है

440

कुड़कली एवं कोकरू स्त्रियाँ पहनती हैं

441

खलिहान में प्रथम बार साफ किए हुए अनाज का ढेर कहलाता है

442

गरासिया, मीणा आदि जनजातियों के पुरुष कान में पहनते हैं

443

गिड़गिड़ी, ढाँणौ, नारियौ, पंजाळी, बुगलियौ, लाव आदि शब्दों का संबंध है

444

गेहूँ-जौ-चने के मिश्रण को कहते हैं

445

घोड़े के मुख के आकार का बना लकड़ी का आभूषण है

446

छज्जे आदि को ठहराने के लिए दीवाल की चुनाई से बाहर निकाला हुआ विशेष पत्थर है

447

तोप आदि की रंजक में आग लगाने की मोटी बत्ती से आशय है

448

दीपावली की संध्या को बच्चों द्वारा मनाया जाने वाला उत्सव है

449

दूध दुहते समय गाय के पाँव बाँधने की रस्सी है

450

बँटाई का कार्य करने वाला एक व्यक्ति है