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शारीरिक कष्ट की मुक्ति हेतु देवता के नाम से बाँधा जाने वाला कच्चे सूत का धागा है
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शीतल वायु की लहर को कहते हैं
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श्वेताम्बर जैन साधुओं व धर्मानुयायियों द्वारा सामायिक (तप या ध्यान) करते समय मुँह पर बाँधी जाने वाली सफेद पट्टी है
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संध्या के समय गाये जाने वाले मांगलिक लोकगीत को कहते हैं
430
साधु संतों का कमण्ल है
431
सेवण, सोंवाौ, सोयलौ आदि हैं
432
स्त्रियों का एक वस्त्र व आभूषण है
433
हाथ से बुना हुआ मोटा कपड़ा और सुनारों का एक उपकरण है
434
होली के दसवें दिन किया जाने वाला एक व्रत है
435
कन्या की विदाई, गौना, दहेज का सामान और प्रथम प्रसव के बाद कन्या को दिया जाने वाला सामान व विदाई से आशय है
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कपड़ों पर कलाबूंती का कार्य करने वाला कारीगर है
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काष्ठ या धातु निर्मित पाात्र, जिसमें मिर्च-मसाले रखने के खाने बने होते हैं
438
कुएँ पर लगा रहने वाला काष्ठ का गोल चक्र है
439
कुम्हार का मिट्टी के बर्तन बनाने का मोटे पत्थर का चक्र है
440
कुड़कली एवं कोकरू स्त्रियाँ पहनती हैं
441
खलिहान में प्रथम बार साफ किए हुए अनाज का ढेर कहलाता है
442
गरासिया, मीणा आदि जनजातियों के पुरुष कान में पहनते हैं
443
गिड़गिड़ी, ढाँणौ, नारियौ, पंजाळी, बुगलियौ, लाव आदि शब्दों का संबंध है
उत्तर
लाव-चड़स/रहँट से सिंचाई करने से
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गेहूँ-जौ-चने के मिश्रण को कहते हैं
445
घोड़े के मुख के आकार का बना लकड़ी का आभूषण है
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छज्जे आदि को ठहराने के लिए दीवाल की चुनाई से बाहर निकाला हुआ विशेष पत्थर है
447
तोप आदि की रंजक में आग लगाने की मोटी बत्ती से आशय है
448
दीपावली की संध्या को बच्चों द्वारा मनाया जाने वाला उत्सव है
449
दूध दुहते समय गाय के पाँव बाँधने की रस्सी है
450
बँटाई का कार्य करने वाला एक व्यक्ति है