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किशनगढ़ चित्रकला शैली का चहुँमुखी विकास हुआ
उत्तर
सावंतसिंह के शासनकाल में
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कोटा चित्र शैली का स्वतंत्र अस्तित्व स्थापित किया
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कोटा चित्र शैली को प्रदर्शित करती है
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कोटा चित्रकला शैली में सर्वाधिक चित्रण हुआ
उत्तर
महाराव उम्मेदसिंह-घ् के समय में
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चित्रकला का प्रतिनिधित्व करते हैं
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चित्रकारी की वह शैली जिस पर लोक-जीवन के चित्रण का विशेष प्रभाव था, जो आज भी पड़ चित्रण के रूप में जीवन्त है
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चित्रित है
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चीनी मिट्टी के बर्तनों पर रंगीन और आकर्षक चित्रकारी को कहते हैं
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छातों के लिए प्रसिद्ध है
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जयपुर ब्ल्यू पॉटरी के लिए प्रसिद्ध है। यह चित्रकारी की जाती है
उत्तर
केवल चीनी मिट्टी के बर्तनों पर
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तिलकायत की गावेर्धनजी के समय अपने चरमोत्कर्ष पर थी
उत्तर
नाथद्वारा चित्रकला शैली
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देवनारायणजी की पड़ के वाचक हैं
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देवनारायणजी की पड़ बाँची जाती है
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नागरीदासजी (सावंत सिंह जी) की प्रमिका थी
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नामक कला विद्यालय स्थापित किया था
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पाबूजी की पड़ के वाचक हैं
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पाबूजी की पड़ में पाबूजी की घोड़ी ‘केसर कालमी’ को चित्रित किया जाता है
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प्रकृति के विस्तृत प्रांगण को चित्रित करने का श्रेय है
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प्रसिद्ध चितेरे नसीरुद्दीन ने ‘रामलला’ का चित्रण किया
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प्रसिद्ध ‘गीत गोविन्द’ चित्र है
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प्राकृतिक रंगों जैसे हिरमच, गैंरू, कालूस, सफेदा पेवड़ी आदि का प्रयोग बहुलता से हुआ है
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बीकानेर चित्र शैली को सर्वाधिक सानिध्य प्रदान किया
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भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध ‘चित्रशाला’ स्थित है
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भित्ति चित्रों के लिए विख्यात बूँदी की ‘चित्रशाला’ का निर्माण करवाया था
उत्तर
राव राजा उम्मेदसिंह ने
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भैसासुर की पड़ के वाचक हैं