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देशी भाषाओं में मारवाड़ की भाषा व्यक्त की गई
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पातळ और पीथल, धरती धोरां री व लीलटांस जैसी राजस्थानी साहित्य की अमूल्य कृतियों के लेखक हैं
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पृथ्वीराज विजय रचना है
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प्रकृति प्रेमी कवि चन्द्रसिंह की रचनाएँ हैं
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प्रतिहार शासक जिसके दरबार में प्रसिद्ध कवि राजशेखर थे
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प्रथम साहित्यिक वेलि है
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प्रेम और शृंगार का सरस लोक काव्य ‘ढोला मारू रा दूहा’ के रचयिता हैं
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बांधणी के कागज की लिपि से सम्बन्धित है
उत्तर
अंकात्मक सांकेतिक लिपि
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मतंग की कृति जिसमें संगीत में राग शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम मिलता है
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मरुड़ पुराण, हालों झाला री कुण्डलियां और हरिरस रचना है
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मारवाड़ी के साहित्यिक रूप को कहा जाता है
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मेरूतुंग ने ई. में रचना की थी
उत्तर
1304 प्रबंध चिन्तामणि ग्रन्थ की
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राजरूपक की भूमिका में डिंगल को राजस्थानी भाषा कहा है
उत्तर
पं. राम करण आसोपा ने
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राजस्थान की प्रसिद्ध कृति ‘सैनानी’ के रचयिता हैं
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राजस्थान के आधुनिक साहित्यकार हैं
उत्तर
रांगेय राघव, विजयदान देथा और नारायणसिंह भाटी
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राजस्थान में 18वीं शताब्दी में सती प्रथा एवं पर्दा प्रथा का प्रचलन था। इस तथ्य की जानकारी मिलती है
उत्तर
‘रासो सौभाग्य महाकाव्य’ ग्रंथ से
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राजस्थानी के विद्वान व राजस्थानी में रामायण के रचयिता हैं
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राजस्थानी रामायण ‘सीताराम चौपाई’ के रचयिता हैं
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राजस्थानी लोक कथाओं के संग्रह ‘बातां री फुलवारी’ के लेखक हैं
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राजस्थानी साहित्य की रचना ‘अचलदास खींची री वचनिका’ के लेखक हैं
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राव सुर्जन हाड़ा के आश्रित कवि थे
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वह कवि जिसने ‘डिंगल’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम किया था
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सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति के बारे में जानकारी मिलती है
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सुन्दर विलास की रचना की थी
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‘उड़ीक पुराण’ के लेखक हैं