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राठौड़ों की कुल देवी, बीकानेर के संस्थापक राव बीकाजी द्वारा स्थापित अठारह भुजाओं वाली प्रतिमा है
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रामदेवजी से संबंधित सुरता खेड़ा स्थित है
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लोक देवता पाबूजी का बोध चिह्न है
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लोक देवता मेहाजी मांगलिया के घोड़े का नाम था
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लोक देवता वीर बावसी का मुख्य मंदिर स्थित है
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लोकदेवता तेजाजी खड़नाल थे
उत्तर
नागवंशीय जाट वंश के
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लोकदेवता तेजाजी, गोगाजी और कल्लाजी पूजे जाते हैं
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वह एकमात्र मंदिर जहाँ देवी की पीठ का ही शृंगार व पूजा होती है
उत्तर
ब्राह्मणी माता का मंदिर
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वह तिथि जब गुर्जर समुदाय दूध को जमाने व बेचने का कार्य नहीं करते हैं
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वह देवी जो रामदेवजी की शिष्या मानी जाती हैं
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वह लोक देवता जिसकी स्मृति में तिलवाड़ा का मेला भरता है
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वह लोक देवता जिसके आशीर्वाद से राव जोधा ने मण्डौर को मेवाड़ आधिपत्य से मुक्त कराया था
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वह लोक देवता जिसके साथ पाबूजी की भतीजी का विवाह हुआ था
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वह लोक देवता जिसने जिंदराव खींची के साथ संघर्ष किया
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वह लोक देवता जो जीवित पीर माने जाते हैं
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वह स्थान जहाँ वीर कल्लाजी की मृत्यु पर कृष्णा जी उनके शव के साथ सती हुई थी
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संत चरणदास की शिष्या थी
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संत रामदेवजी को ‘पीरों का पीर’ की पदवी दी थी
उत्तर
मक्का से आए पीरों ने
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सावित्री माता का मंदिर स्थित है
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सुगनचिड़ी को लोकमानस में स्वरूप माना जाता है
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सेना के जवानों की श्रद्धेय देवी हैं
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हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर है
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हिन्दू धर्म के अनुयायी लोक देवता रामदेवजी को अवतार मानते हैं
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आजीवन ब्रह्मचारिणी रहकर घोर तपस्या कर शक्तियाँ अर्जित कर देवी के रूप में प्रतिष्ठित हुई हैं
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कोटा राजपरिवार की कुलदेवी हैं