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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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476

स्त्रियोंं की भुजा का आभूषण है

477

आथांण से तात्पर्य है

478

आवणियौ, कुदावणियौ, अक्कड़-बक्कड़ आदि हैं

479

कलाळी, कांगसियौ, कामण एवं कुकड़लौ (कुकड़ेलौ) आदि हैं

480

कांच, लाख, हाथीदांत आदि की बनी चूड़ियों का समूह जिसे औरतें हाथ की कलाई पर धारण करती हैं

481

किसी देवी देवता का मंदिर अथवा चबूतरा कहलाता है

482

कृषक के पास कृषि कार्य करने वाला नौकर है

483

खेत की मेढ़ पर बनी पगडंडी या संकरा रास्ता कहलाता है

484

घोड़े के सिर पर लगाई जाने वाली कलंगी है

485

चरखे का एक उपकरण है

486

चाँद-सूरज, चूड़ारल, टीका, टिडी-भळकौ इत्यादि आभूषण सुशाोभित करते हैं

487

जागीरदारों द्वारा अपनी प्रजा से ली जाने वाली बेगार है

488

जिस जमीन में केवल बरसात के पानी से फसल होती है, उसे कहते हैं

489

जीरो, जीरोणी, झिरमटियौ, झूलौ आदि हैं

490

दुर्भिक्ष के समय मवेशी को पानी व घास वाले प्रदेश में ले जाने की क्रिया कहलाती है

491

देवी-देवता संबंधी गायन या चरचा विशेष कहलाता है

492

नगारखाना से संबंधित है

493

नवरात्रा स्थापना पर देवी के निमित्त दीवार पर चिपकाये जाने वाले रंग-बिरंगे कागजों के चिह्न हैं

494

नागदमणी, नागापोलरी, मणिमालल इत्यादि हैं

495

पहले श्रावण मास में वधू के लिए भेजे जाने वाले वस्त्र, खाद्य पदार्थ आदि कहलाते हैं

496

पाठशाला के छात्रों द्वारा बोली जाने वाली गिनती से आशय है

497

फूलों के हार के बीच में लगाया जाने वाला भिन्न रंग का पुष्प या कागज है

498

फूस, कचरा आदि डालने की जगह है

499

बूँदी राज्य का एक प्राचीन सिक्का है

500

बेगार का काम करने वाली स्त्री को कहते हैं