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स्त्रियोंं की भुजा का आभूषण है
477
आथांण से तात्पर्य है
478
आवणियौ, कुदावणियौ, अक्कड़-बक्कड़ आदि हैं
उत्तर
राजस्थान में खेले जाने वाले देशी खेल
479
कलाळी, कांगसियौ, कामण एवं कुकड़लौ (कुकड़ेलौ) आदि हैं
480
कांच, लाख, हाथीदांत आदि की बनी चूड़ियों का समूह जिसे औरतें हाथ की कलाई पर धारण करती हैं
481
किसी देवी देवता का मंदिर अथवा चबूतरा कहलाता है
482
कृषक के पास कृषि कार्य करने वाला नौकर है
483
खेत की मेढ़ पर बनी पगडंडी या संकरा रास्ता कहलाता है
484
घोड़े के सिर पर लगाई जाने वाली कलंगी है
485
चरखे का एक उपकरण है
486
चाँद-सूरज, चूड़ारल, टीका, टिडी-भळकौ इत्यादि आभूषण सुशाोभित करते हैं
उत्तर
स्त्रियों के सिर को
487
जागीरदारों द्वारा अपनी प्रजा से ली जाने वाली बेगार है
488
जिस जमीन में केवल बरसात के पानी से फसल होती है, उसे कहते हैं
489
जीरो, जीरोणी, झिरमटियौ, झूलौ आदि हैं
490
दुर्भिक्ष के समय मवेशी को पानी व घास वाले प्रदेश में ले जाने की क्रिया कहलाती है
491
देवी-देवता संबंधी गायन या चरचा विशेष कहलाता है
492
नगारखाना से संबंधित है
493
नवरात्रा स्थापना पर देवी के निमित्त दीवार पर चिपकाये जाने वाले रंग-बिरंगे कागजों के चिह्न हैं
494
नागदमणी, नागापोलरी, मणिमालल इत्यादि हैं
495
पहले श्रावण मास में वधू के लिए भेजे जाने वाले वस्त्र, खाद्य पदार्थ आदि कहलाते हैं
496
पाठशाला के छात्रों द्वारा बोली जाने वाली गिनती से आशय है
497
फूलों के हार के बीच में लगाया जाने वाला भिन्न रंग का पुष्प या कागज है
498
फूस, कचरा आदि डालने की जगह है
499
बूँदी राज्य का एक प्राचीन सिक्का है
500
बेगार का काम करने वाली स्त्री को कहते हैं