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501
बैलों के नाक में बांधी जाने वाली रस्सी कहलाती है
502
बोवाई करने की बांस की नलिका जो हल के पीछे बंधी रहती है तथा हवा करने की पंखी कहलाती है
503
मिट्टी का बना रोटी पकाने का तवा कहलाता है
उत्तर
केरूड़ी, केलड़ौ, पौणी
504
मृतक को दफन करके घर आने के बाद खिलाई जाने वाली शोक की खिचड़ी है
505
यात्रा में साथ लिया जाने वाला दरी, बिस्तर आदि का बंडल है
506
राजदरबार की गायिकाएँ और तबलचियों के रहने व उनके साज सामान रखने के स्थान से संबंधित है
507
राजस्थान में क्षेत्र बदलने के साथ बदल जाता है
508
राजाओं के समय एक विभाग विशेष, जिसमें गाने वाली जातियों को दिये जाने वाले दान आदि का विवरण रहता था
509
राज्य की तरफ से ब्राह्मण, साधु, चारण, भाट आदि को दान में दी हुई करमुक्त भूमि या गाँव कहलाता है
510
रेजगारी कौड़ी आदि छोटे सिक्कों का विनिमय करने वाला बनिया कहलाता है
511
रोटी के साथ खाई जाने वाली साग-तारकारी है
512
वह स्त्री या कन्या जिसे विवाहित कन्या के प्रथम बार ससुराल जाते समय उसके साथ भेजा जाता है, उसे कहते हैं
513
विवाहादि विशिष्ट अवसरों पर बने भोजन विशेष का अंश जो संबंधियों व मिलने वालों के घर बाँटा जाता है, को कहते हैं
514
विशेषत: पुरुषों के इस आभूषण की बनावट चौकोर जालियों की जंजीर की तरह होती है तथा इसे सीने, कमर और पैर पर लपेट कर पहना जाता है, यह आभूषण है
515
संबंधियों के यहाँ सौगात के रूप में भेजी जाने वाली वस्तुओं की छोटी गठरी है
516
सामूहिक रूप से गोलाकार घूमते हुए किया जाने वाला नृत्य व गायन है
517
सोने-चांदी के तार खींचने का एक औजार है
518
स्यावळ (सोल), कण्णी (करणी) और गुणिया आदि हैं
उत्तर
भवन निर्माण करने वाले कारीगर के औजार
519
हल चलाने वाला व्यक्ति है
520
‘थुंडी’ नामक आभूषण स्त्रियाँ धारण करती हैं
521
‘फोलरी’ नामक आभूषण पहना जाता है
522
‘मांदलिया’ पहना जाता है
523
अफीम को गलाकर छानने का उपकरण है
524
अस्त्र-शस्त्रों को खड़े व सीधे जमा कर बनाया हुआ ढेर है
525
कंठी नामक आभूषण पहना जाता है