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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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501

बैलों के नाक में बांधी जाने वाली रस्सी कहलाती है

502

बोवाई करने की बांस की नलिका जो हल के पीछे बंधी रहती है तथा हवा करने की पंखी कहलाती है

503

मिट्टी का बना रोटी पकाने का तवा कहलाता है

504

मृतक को दफन करके घर आने के बाद खिलाई जाने वाली शोक की खिचड़ी है

505

यात्रा में साथ लिया जाने वाला दरी, बिस्तर आदि का बंडल है

506

राजदरबार की गायिकाएँ और तबलचियों के रहने व उनके साज सामान रखने के स्थान से संबंधित है

507

राजस्थान में क्षेत्र बदलने के साथ बदल जाता है

508

राजाओं के समय एक विभाग विशेष, जिसमें गाने वाली जातियों को दिये जाने वाले दान आदि का विवरण रहता था

509

राज्य की तरफ से ब्राह्मण, साधु, चारण, भाट आदि को दान में दी हुई करमुक्त भूमि या गाँव कहलाता है

510

रेजगारी कौड़ी आदि छोटे सिक्कों का विनिमय करने वाला बनिया कहलाता है

511

रोटी के साथ खाई जाने वाली साग-तारकारी है

512

वह स्त्री या कन्या जिसे विवाहित कन्या के प्रथम बार ससुराल जाते समय उसके साथ भेजा जाता है, उसे कहते हैं

513

विवाहादि विशिष्ट अवसरों पर बने भोजन विशेष का अंश जो संबंधियों व मिलने वालों के घर बाँटा जाता है, को कहते हैं

514

विशेषत: पुरुषों के इस आभूषण की बनावट चौकोर जालियों की जंजीर की तरह होती है तथा इसे सीने, कमर और पैर पर लपेट कर पहना जाता है, यह आभूषण है

515

संबंधियों के यहाँ सौगात के रूप में भेजी जाने वाली वस्तुओं की छोटी गठरी है

516

सामूहिक रूप से गोलाकार घूमते हुए किया जाने वाला नृत्य व गायन है

517

सोने-चांदी के तार खींचने का एक औजार है

518

स्यावळ (सोल), कण्णी (करणी) और गुणिया आदि हैं

519

हल चलाने वाला व्यक्ति है

520

‘थुंडी’ नामक आभूषण स्त्रियाँ धारण करती हैं

521

‘फोलरी’ नामक आभूषण पहना जाता है

522

‘मांदलिया’ पहना जाता है

523

अफीम को गलाकर छानने का उपकरण है

524

अस्त्र-शस्त्रों को खड़े व सीधे जमा कर बनाया हुआ ढेर है

525

कंठी नामक आभूषण पहना जाता है