पेज 22 / 32
526
कड़बी आदि के पुआलों को खड़े व गोलाकार रखकर बनाया हुआ ढेर है
527
खाट के पायों में छेदकर ईस और ऊपलों को बिठाना कहलाता है
528
खड़ी फसल का तय किया जाने वाला परिणाम है
529
ग्रामीण पुरुषों के कान का आभूषण है
530
घोड़े या ऊँट की पीठ पर कसे जो वाले आसन को कहते हैं
531
जिस राज्य कर्मचारी या मंत्री के अधिकार में अन्य राज्यों से संधि या युद्ध करनने का कार्य रहता था, वह था
532
झोटा आभूषण पहना जाताा है
533
डोड्या, बंगड़ी, गोखरू, नोगरी, अणत, सामान्यत: पहने जाते हैं
534
ताल के कपड़े का टुकड़ा जो मेवाड़ के ऊँचे दर्जे वाले सरदारों की पगड़ियों में लगाया जाता था
535
दहेज के समय कन्या पक्ष की ओर से वर की माता को दी जाने वाली पोशाक है
536
दुखदायी या दर्दयुक्त होना कहलाता है
537
दूल्हे व दुल्हान की वेशभूषा है
538
पत्थर की बनी हाथ की छोटी चक्की है
539
पशुओं के लिए बाँटा पकाने का घटाकृति चूल्हा है
540
पालीवाल ब्राह्मणों में मृत्युभोज में किया जाने वाला विष्णुयज्ञ कहलाता है
541
पुत्र जन्मोत्सव पर गाया जाने वाला एक लोकगीत है
542
पुत्र जन्मोत्सव पर माता को ओढ़ाया जाने वाला एक प्रकार का मांगलिक ओढ़ना है
543
फसल काटते समय सांड आदि के लिए छोड़ा जाने वाला फसल का भाग है
544
फसल की सिंचाई करने की क्रिया है
545
फौलरी, बंगड़ी, बोरला, बंजटी, बाजूबंद आदि हैं
उत्तर
स्त्रियोेंं के आभूषण
546
बंद बोरी से अनाज का नमूना देखने का उपकरण है
547
बर्तन बनाने हेतु कुम्हार की चाक पर रखा जाने वाला मिट्टी का लोंदा है
548
बारहवें दिन का मृत्यु भोज कहलाता है
549
भूमि को भागों में विभाजित कर सीमाबंदी करने की क्रिया है
550
मिट्टी का एक पात्र है