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मृतक की अंत्येष्टि और गणगौर की विदाई से संबंधित है
552
राजस्थान के पूर्व मध्यकालीन राज्यों में ‘नैमित्तिक’ पदनाम का प्रयोग किया जाता था
उत्तर
राजकीय ज्योतिष के लिए
553
राजस्थान में विवाहोपरांत दूल्हा-दुल्हन द्वारा खेले गये एक खेल से संबंधित है
554
लूंग, भंवर्या, फीणी, बेसरि आदि आभूषण संबंधित हैं
555
वर्षा ऋतु में मवेशियों के मुँह में होने वाला एक रोग है
556
वह आभूषण जो सुहाग का चिह्न है
557
वह स्त्री जिसके घर में पुत्र या पुत्री के विवाह के मांगलिक कृत्य होंं, से आशय है
558
विवाह की रस्म प्रारम्भ करने का प्रथम दिन है
559
विवाह के समय वर पक्ष की ओर से वधू के लिए भेंट किए जाने वाले श्रेष्ठ वस्त्र से संबंधित है
560
विवाह के समय वर पक्ष की ओर से वधू के लिए भेजी जाने वाली पोशाक कहलाती है
561
विवाह, त्योहार आदि अवसरों पर संबंधियों के यहाँ भेजे जाने वाले पकवानादि की भेंट को कहते हैं
562
शव से संबंधित कार्य करने वाला व्यक्ति है
563
शिल्पकारों का एक औजार है
564
श्रावण मास में गाया जाने वाला एक लोकगीत एवं झूला है
565
सूर्योदय के समय भेड़िये का बायें से दायें आने के कारण होने वाले अपशकुन से संबंधित है
566
सोने के तार का बना आभूषण जिसमें नाचता हुआ मोर चिह्नित होता है तथा जिसमें एक धागा बंधा होता है
567
हल की नोंकक के नीचे लगी रहने वाली एक छोटी नुकीली लकड़ी है
568
‘बाल्लया’ आभूषण पहना जाता है
569
अनाज को ओखली में डालकर छड़ने-कूटने का एक मोटा ंडंडा है
570
अनाज भरने की बड़ी कोठी, पूर्वजों का मकान और बड़ा घर है
571
अश्वारोही सेना को कहते हैं
572
आज्यास्थाळी से आशय है
उत्तर
गीली मिट्टी का ढेला
573
किसी की मृत्यु के उपरांत परिवार वालों के पास संवेदना प्र्रकट करने का स्थान व उस पर बिछाने का वस्त्र तथा ऐसे स्थान पर बैठने की क्रिया को कहते हैं
574
किसी की रखवाली (निगरानी) या चौकसी करना कहलाता है
575
खलिहान के चारों ओर खोदी जाने वाली खाई है