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गले का आभूषण है
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गले का एक आभूषण विशेष है
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गाँव-गाँव फिरकर काम करने वाला स्वर्णकार कहलाता है
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चम्पाकली आभूषण पहना जाता है
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चौकोर वस्त्र के तीन कोणों को परस्पर जोड़ कर बनाया जाने वाला थैला है
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जिसके पाँव तिरछे पड़ते हों उसे कहते हैं
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झेला, जमेला, पीपलपत्रा, अंगोट्या आभूषण हैं
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टोटी आभूषण पहना जाता है
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दुल्हन की झोली भरने (गोद भाराई) की रस्म है
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दूल्हे को ससुराल से दी जाने वाली एक भेंट है
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धातु का बना हुआ बड़ा पात्र है
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नील गाय को कहते हैं
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पकाए हुए मीठे चावल को कहते हैं
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परिवार के वृद्ध की मृत्यु पर दाढ़ी, मूँछ व सिर के बाल मुंडवाने की क्रिया है
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पाणिग्रहण के समय वर-वधू के द्वारा की जाने वाली यज्ञाग्नि परिक्रमा है
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बैलगाड़ी पर अनाज आदि भरने के लिए लगाई जाने वाली झाऊ, खींप आदि घास के सींकों की टाटी कहलाती है
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बैलों पर माल ढोकर देशान्तर में व्यापार करने वाला बनजारा कहलाता है
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भेड़-बकरियों का झुंड या दल है
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भोजनोपरांत हाथ धोने व कुल्ला करने की क्रिया
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मँगनी के समय कन्या पक्ष की ओर से वर को दी जाने वाली भेंट
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मकान के ऊपर बना कमरा, अटारी है
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महिलाओं द्वारा गले पर पहना जाता है
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मांगलिक अवसरोें, विवाह आदि पर रिश्तेदारों एवं पड़ोसियों आदि मेंं बाँटी जाने वाली मिठाई को राजस्थान में कहते हैं
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मृतक की अर्थी तैयार करने की क्रिया
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राजस्थान में ‘बंगड़ी’ आभूषण पहना जाता है