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राजस्थानी गद्य साहित्य की एक विधा है
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राजा महाराजाओं द्वारा प्रसन्न होकर दिया जाने वाला लाख रुपयों का इनाम कहलाता है
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रात्रि भर का जागरण कहलाता है
604
रामदेव पीर की भक्त एक मेघवाल जाति
605
लूणियौ से आशय है
उत्तर
मक्खन, एक प्रकार की घास
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वर के दादा, पिता, ताऊ, चाचा जो बारात में हों, से आशय है
607
वह काव्य या रचना, जिसमेंं किसी महान योद्धा या व्यक्ति का चरित्र चित्रण हो, उसे कहते हैं
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वह गठरी जिसमें वस्त्र या फुटकर सामग्री बाँधी जाती है
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वह भूमि या गाँव जहाँ रबी और खरीफ दोनों फसलें होती हैं
610
विसूंदरी है
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शत्रु द्वारा किले की दीवार तक पहुँचने के लिए बनाया जाने वाला ऊँचा व ढका हुआ मार्ग विशेष कहलाता है
612
शव दाह क्रिया में रथि में आग लगाने के लिए जलायी जाने वाली एक प्रकार की घास है
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शीशफूल नामक आभूषण पहना जाता है
614
सफेद रंग की चूड़ियाँ कहलाती हैंं
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सुरलिया एक आभूषण है, जिसे पहना जाता है
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सेम की फली है
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सोरापौ से आशय है
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स्त्रियों के कान का आभूषण है
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स्त्रियों के ललाट का एक आभूषण
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हल के साथ बॅँधा हुआ खोखले बाँस का उपकरण जो बीज बोने के काम आता है
621
‘कन्दोरा’ नामक आभूषण औरतों द्वारा पहना जाता है
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‘बारी’ आभूषण पहना जाता है
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‘मेमंद’ आभूषण पहना जाता है
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आदिवासियों में वर पक्ष द्वारा वधू के पिता को वधू मूल्य के रूप में धन देने की प्रथा कहलाती है
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आदिवासी जातियों में पत्नी अपने पति को छोड़कर दूसरे पुरुष के साथ रहने लग जाती है, यह प्रथा है