पेज 27 / 32
651
प्रेम विवाह का परम्परागत नाम है
652
बच्चों के गले में बाँधे जाने वाला ताबीज कहलाता है
653
बाँटी जाने वाली मिठाई का भाग है
654
बाजरी के कटे पौधे का ढेर कहलाता है
655
भेंटस्वरूप दिया जाने वाला वस्त्र विशेष कहलाता है
656
मकान के अंदर घुसते ही आने वाला पहला कमरा है
657
मसाले पीसने की सिल को कहते हैं
658
माही नदी का तटीय भाग है
659
यात्रा में आगे चलने वाला और भय स्थानों और शत्रुओं की सूचना देने वाला व्यक्ति कहलाता है
660
राजपूतों में बारात के साथ वधु के लिए कपड़े आदि ले जाने की प्रथा है
661
राजस्थान के अलवर-मेवात क्षेत्र में प्रसिद्ध है
662
राजस्थान में 18वीं शताब्दी में सती प्रथा व पर्दा प्रथा के प्रचलन की जानकारी मिलती है
उत्तर
हम्मीर महाकाव्य ग्रन्थ में
663
राजस्थान में 8वीं से 12वीं शताब्दी के मध्य सर्वाधिक पूजे जाने वाले देवता रहे हैं
664
राजस्थानी लोकजीवन में बच्चे के जन्म की पहली होली पर प्रसूता के पीहर पक्ष की ओर से किया जाने वाला संस्कार है
665
राजस्थानी संस्कृति में ‘औलंदी’ है
उत्तर
नववधू के साथ जाने वाली लड़की या स्त्री
666
राजाओं की सवारी के आगे चलने वाला चौबदार कहलाता है
667
रोटी के साथ लगाकर खाया जाने वाला पदार्थ है
668
वह राजस्थानी लोकगीत जो पति-पत्नी में विरह के वियोग का वर्णन करता है
669
वागड़ क्षेत्र (डूंगरपुर-बाँसवाड़ा) में मकर संक्रांति पर गायी जाने वाली श्रवण कुमार की गाथा कहलाती है
670
विवाह के समय दूल्हे या दुल्हन के मुख पर की जाने वाली सुनहरी चित्रकारी को कहते हैं
671
विवाहोपरांत वधू पक्ष की ओर से दिया जाने वाला भोजन कहलाता है
672
शराब बेचने का कार्य करने वाली एक जाति है
673
शराब या हुक्का पिलाने वाला व्यक्ति कहलाता है
674
सायं/रात्रिकालीन भोजन को कहते हैं
675
स्त्रियों द्वारा कार्तिक मास में किया जाने वाला व्रत है