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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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651

प्रेम विवाह का परम्परागत नाम है

652

बच्चों के गले में बाँधे जाने वाला ताबीज कहलाता है

653

बाँटी जाने वाली मिठाई का भाग है

654

बाजरी के कटे पौधे का ढेर कहलाता है

655

भेंटस्वरूप दिया जाने वाला वस्त्र विशेष कहलाता है

656

मकान के अंदर घुसते ही आने वाला पहला कमरा है

657

मसाले पीसने की सिल को कहते हैं

658

माही नदी का तटीय भाग है

659

यात्रा में आगे चलने वाला और भय स्थानों और शत्रुओं की सूचना देने वाला व्यक्ति कहलाता है

660

राजपूतों में बारात के साथ वधु के लिए कपड़े आदि ले जाने की प्रथा है

661

राजस्थान के अलवर-मेवात क्षेत्र में प्रसिद्ध है

662

राजस्थान में 18वीं शताब्दी में सती प्रथा व पर्दा प्रथा के प्रचलन की जानकारी मिलती है

663

राजस्थान में 8वीं से 12वीं शताब्दी के मध्य सर्वाधिक पूजे जाने वाले देवता रहे हैं

664

राजस्थानी लोकजीवन में बच्चे के जन्म की पहली होली पर प्रसूता के पीहर पक्ष की ओर से किया जाने वाला संस्कार है

665

राजस्थानी संस्कृति में ‘औलंदी’ है

666

राजाओं की सवारी के आगे चलने वाला चौबदार कहलाता है

667

रोटी के साथ लगाकर खाया जाने वाला पदार्थ है

668

वह राजस्थानी लोकगीत जो पति-पत्नी में विरह के वियोग का वर्णन करता है

669

वागड़ क्षेत्र (डूंगरपुर-बाँसवाड़ा) में मकर संक्रांति पर गायी जाने वाली श्रवण कुमार की गाथा कहलाती है

670

विवाह के समय दूल्हे या दुल्हन के मुख पर की जाने वाली सुनहरी चित्रकारी को कहते हैं

671

विवाहोपरांत वधू पक्ष की ओर से दिया जाने वाला भोजन कहलाता है

672

शराब बेचने का कार्य करने वाली एक जाति है

673

शराब या हुक्का पिलाने वाला व्यक्ति कहलाता है

674

सायं/रात्रिकालीन भोजन को कहते हैं

675

स्त्रियों द्वारा कार्तिक मास में किया जाने वाला व्रत है