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स्त्री पुरुषों को दासों के रूप में रखने पर उन्हें कहते थे
677
हाथी को बाँधने का खूँटा कहलाता है
678
कलाई में पहनने का सोने या चाँदी का ठोस कड़ा कहलाता है
679
कान के ऊपरी भाग में पहने जाने वाली बाली है
680
किसी मांगलिक कार्य या यात्रादि को आरम्भ करने के लिए वार गणना से निकाला जाने वाला मुहूर्त कहलाता है
681
कुएँ से पानी निकालने के चक्र की धुरी कहलाती है
682
खेतों में बीज डालने के लिए हल के साथ उपयोग करते हैं
683
गाँव के बाहर सटा हुआ क्षेत्र कहलाता है
684
चिकित्सालय को कहते हैं
685
चौदह गाँठों वाला सूत का गंडा है
686
जलाशय की मिट्टी खोदने की एक माप है
687
जागीरदार, सामंतों की स्त्रियों के प्रति सम्मानसूचक संबोधन शब्द है
688
जाती है, को कहते हैं
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जुते हुए खेतों को चौरस करने के लिए लकड़ी का चौड़ा पाट कहलाता है
690
टड्डौ, टणको, झैलो आदि है
691
दही मथने के उपकरण से संबंधित है
692
दाम्पत्य बंधन, विवाह में होने वाला भंवर या फेरे और सिर पर बाँधने का वस्त्र, साफा, पगड़ी, इन सभी से संबंधित है
693
धोती या लंगोट का वह छोर जो दोनों जांघों के बीच से कमर के दोनों ओर बांधा रहता है, उसे कहते हैं
694
नमक का व्यवसाय करने वाली जाति कहलाती है
695
नागर बेल का पान है
696
पशुओं के चरने के लिए छोड़ी गई भूमि से संबंधित है
697
पानी भरने व पालकी उठाने का व्यवसाय करने वाली जाति है
698
पालना लटकाने का लकड़ी का उपकरण है
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पितृ पक्ष वालों का कुछ रुपए देकर प्रथम बार पुत्री के ससुराल में भोजन करने की रीति है
700
पुस्तक रखने के काष्ठ के उपकरण को कहते हैं