पेज 29 / 32
701
पूरे आकाश में छाई हुई धूल कहलाती है
702
फसल के बाद कटाई करने को कहते हैं
703
बगीचों में गिलहरियों को पकड़ने के लिए मिट्टी का एक ढक्कनदार पात्र कहलाता है
704
बारात को दी जाने वाली विदाई को कहते हैं
705
बेगार में काम करने वाला व्यक्ति कहलाता है
706
भूसा आदि भरने के लिए बैलगाड़ी पर टहनियों या बकरी के बालों से बनाई हुई कनात को कहते हैं
707
मिट्टी की हांडियाँ जिसमें दही जमाया जाता है, कहलाती है
708
मृतक के पीछे किया जाने वाला कर्म है
709
रसोईघर में नमक, मिर्च तथा मसाला रखने का लकड़ी का पात्र कहलाता है
710
राजा द्वारा सम्मानार्थ दिया जाने वाला वस्त्र है
711
रोटी रखने का पात्र कहलाता है
712
लकड़ी की पेटी जिसमें देवी की मूर्ति रखी जाती है, को कहते हैं
713
लकड़ी से बना यन्त्र, जिस पर चूड़ीगर, चूड़िया उतारता है, कहलाता है
714
लुबकौ, लुवारौ से आशय है
715
वस्त्रों पर सलमें आदि का कार्य करने वाला कारीगर कहलाता है
716
विवाह आदि अवसरों पर जाति बिरादरी में बाँटे गए भीगे हुए चावल और पोस्त के दाने को कहते हैं
717
विवाह के समय वर-वधू के वंश, गौत्रादि का दिया जाने वाला परिचय कहलाता है
718
शकट का प्रयोग किया जाता है
719
शिक्षण संस्था और पाठशालाओं की देखभाल करने वाला विभाग है
720
श्वेताम्बर जैन साधुओं के मुख पर बाँधे रखने का एक सफेद वस्त्र का टुकड़ा है
721
सिर के पार्श्व बालों की गुथई को कहते हैं
722
सेना के अग्र भाग को कहते हैं
723
स्त्रियों द्वारा भुजा पर बाँधने का ताम्राभूषण है
724
हथिया बनाने वाले होते हैं
725
‘गेहर’ में उपयोग में ली जाने वाली पतली छड़ी है