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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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701

पूरे आकाश में छाई हुई धूल कहलाती है

702

फसल के बाद कटाई करने को कहते हैं

703

बगीचों में गिलहरियों को पकड़ने के लिए मिट्टी का एक ढक्कनदार पात्र कहलाता है

704

बारात को दी जाने वाली विदाई को कहते हैं

705

बेगार में काम करने वाला व्यक्ति कहलाता है

706

भूसा आदि भरने के लिए बैलगाड़ी पर टहनियों या बकरी के बालों से बनाई हुई कनात को कहते हैं

707

मिट्टी की हांडियाँ जिसमें दही जमाया जाता है, कहलाती है

708

मृतक के पीछे किया जाने वाला कर्म है

709

रसोईघर में नमक, मिर्च तथा मसाला रखने का लकड़ी का पात्र कहलाता है

710

राजा द्वारा सम्मानार्थ दिया जाने वाला वस्त्र है

711

रोटी रखने का पात्र कहलाता है

712

लकड़ी की पेटी जिसमें देवी की मूर्ति रखी जाती है, को कहते हैं

713

लकड़ी से बना यन्त्र, जिस पर चूड़ीगर, चूड़िया उतारता है, कहलाता है

714

लुबकौ, लुवारौ से आशय है

715

वस्त्रों पर सलमें आदि का कार्य करने वाला कारीगर कहलाता है

716

विवाह आदि अवसरों पर जाति बिरादरी में बाँटे गए भीगे हुए चावल और पोस्त के दाने को कहते हैं

717

विवाह के समय वर-वधू के वंश, गौत्रादि का दिया जाने वाला परिचय कहलाता है

718

शकट का प्रयोग किया जाता है

719

शिक्षण संस्था और पाठशालाओं की देखभाल करने वाला विभाग है

720

श्वेताम्बर जैन साधुओं के मुख पर बाँधे रखने का एक सफेद वस्त्र का टुकड़ा है

721

सिर के पार्श्व बालों की गुथई को कहते हैं

722

सेना के अग्र भाग को कहते हैं

723

स्त्रियों द्वारा भुजा पर बाँधने का ताम्राभूषण है

724

हथिया बनाने वाले होते हैं

725

‘गेहर’ में उपयोग में ली जाने वाली पतली छड़ी है