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राजस्थान राज्य के सीकर, झुंझुनूं, चुरू, पाली, नागौर एवं जालौर जिलों में प्रमुख रूप से पाई जाती है
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राजस्थान राज्य में मरुस्थल के प्रसार को रोकने के उपाय हैं
उत्तर
शुष्क कृषि को प्रोत्साहन व चराई पर नियंत्रण 1. सिंचाई के साधनों का विकास 2. मरुभूमि के अनुकूल वृक्षों का 3. अधिक से अधिक रोपण
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राज्य की सबसे अनुपजाऊ मिट्टी है
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राज्य की सीमा पर नदी द्वारा भयंकर कटाव होता है
उत्तर
मध्य प्रदेश, राजस्थान सीमा पर
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रेतीली मिट्टी राज्य के पश्चिमी जिलों में विस्तृत है, इस मिट्टी में बालू की मात्रा होती है
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वह प्रक्रिया जिससे पश्चिमी राजस्थान की मिट्टियाँ अम्लीय तथा क्षारीय हो जाती हैं
उत्तर
नीचे से ऊपर की ओर कोशिकाओं द्वारा रिसाव
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वह मिट्टी जो वनस्पति उगाने में अनुपयुक्त है
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सामान्य मृदा का मान रहता है
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हाड़ौती पठार की मिट्टी है
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‘खसरा’ संबंधित है
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256 मरुभूमि में वायु मिट्टी अपरदित होकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर बिछाने की क्रिया कहलाती है
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अधिकांश मृदाओं का स्थूल घनत्व होता है
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अम्लीय मिट्टी को कृषि योग्य बनाने के लिए उपयोग करना चाहिए
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अवनालिका अपरदन/कन्दरा समस्या से सर्वाधिक प्रभावित जिला है
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कपास की फसल के लिए उपर्युक्त मिट्टी है
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काजरी (केन्द्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान केन्द्र) स्थित है
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कृषि के लिए सबसे अधिक उपयुक्त मिट्टी है
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क्षारीय मिट्टी का पी.एच. मान होता है
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खारी मिट्टी में उग सकती है
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खोला गया
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गेहूँ की फसल के लिए उपर्युक्त मिट्टी है
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जिन मिट्टियों में प्राय: जैविक पदार्थ, कार्बन और नाइट्रोजन की मात्रा निम्न से मध्यम तक पाई जाती है, वे हैं
उत्तर
भारी, मध्यम भारी एवं गहरी मध्यम भारी मिट्टी
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पीली मिट्टी के क्षेत्रों में बाई जाने वाली फसल है
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बलुई व दोमट मिट्टी पर ही की जाने वाली पिपरमिंट की खेती जिसे ‘शिवाला खेती’ भी कहते हैं, के उत्पादित होने का एकमात्र स्थान है
उत्तर
खण्डार (सवाईमाधोपुर)
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बाजरा की फसल के लिए उपर्युक्त मिट्टी है