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राजस्थान का इतिहास

राजस्थान में स्वतंत्रता आंदोलन एवं जनजागरण (प्रजामण्डल, किसान एवं जनजातीय आंदोलन)

552 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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राष्ट्रभक्त तैयार करने के उद्देश्य से बिजौलिया में ‘विद्या प्रचारिणी सभा’ की स्थापना की गई थी

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वागड़ क्षेत्र में आदिवासियों के मसीहा एवं उद्धारक गुरु गोविन्द गिरि के अनुयायी कहलाते थे

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सिंह गौरीर अलवर के दीवान जिसे महात्मा गांधी की हत्या जनवरी,

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स्वाधीनता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है, यह कथन है

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स्वामी केशवानन्द का मूल नाथ था

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स्वामी दयानन्द सरस्वती का देहान्त हुआ था

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स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा राजस्थान में आर्य समाज की स्थापना सर्वप्रथम की गई थी

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हरिजन शिक्षा के लिए स्थापना की गई थी

59

‘अजमेर म्यूनिसिपल कमेटी’ का प्रथम भारतीय अध्यक्ष था

60

‘पाँचजन्य’ के रचनाकार हैं

61

‘मरूधर मित्र हितकारिणी सभा’ को ‘मारवाड़ हितकारिणी सभा’ के रूप में परिवर्तित करने का श्रेय दिया जाता है

62

‘राजपूताना गजेटियर’ नामक समाचार पत्र का प्रकाशक/सम्पादक था

63

‘शेखावाटी ब्रिगेड’ स्थापित की गई

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16 1938 परिषद का गठन कर इसका नेतृत्व सौंपा

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1875 सिंह ने लाखों रुपये खर्च कर बड़े-बड़े जलसों और रोशनी का प्रबंध किया। यह समारोह प्रसिद्ध हुआ

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1889 किया

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1942 नेतृत्व में कोटा तीन दिन तक आजाद रहा था

68

1947 कर उत्तरदायी सरकार बनाने की दिशा में कुछ कदम उठाए गए, सिवाय एक रियासत को छोड़कर, उसका नाम है

69

20वीं शताब्दी के प्रारम्भ में आदिवासी समुदाय में जनजागृति के प्रणेता गुरु गोविन्द गिरि का अंतिम समय व्यतीत हुआ

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अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद अधिवेशन की अध्यक्षता की थी

71

जोधपुर में जन्में प्रसिद्ध राष्ट्रवादी कवि जिन्होंने में दैनिक

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नवीन राजस्थान एवं प्रताप समाचार पत्र में विस्तारपूर्वक लेखन किया गया

73

नारायण चतुर्वेदी, भूदेवदत्त शर्मा और वीरेन्द्र सिंह चौहान ने प्रकाशन किया

74

नारायणी देवी वर्मा ‘राज्यसभा’ की सदस्य बन गई थीं

75

बीकानेर में आजादी के आंदोलन का जनक कहा जाता है