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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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51

दूध के ऊपर जमने वाली मलाई को कहते हैं

52

दूल्हे-दुल्हन की विवाह की जूतियाँ को राजस्थानी भाषा में कहा जाता है

53

पर्दानशीन स्त्रियों के पर्दा करने का वस्त्र है

54

पशुओं को भूसी चराने का काष्ठ का उपकरण और खेतों में सामूहिक रूप से परस्पर बिना पारिश्रमिक काम करने की प्रथा है

55

पीर-औलियाओं की प्रशंसा में गाया जाने वाला गीत है

56

पुत्री की विदाई पर गाये जाने वाला लोकगीत है

57

पुरुषों हेतु ऊन का बना वस्त्र जो सर्दी और वर्षा से बचाव हेतु ओढ़ा जाता है

58

पूजा के समय विध्न निवारणार्थ चारों और फेंके जाने वाले अभिमंत्रित चावल को कहते हैं

59

बंधेज कला द्वारा पाँच रंगों से रंगा साफा कहलाता है

60

मृतक के पीछे किया जाने वाला भोज कहलाता है

61

याददाश्त के लिए की जाने वाली लिखावट है

62

युवराज का छोटा भाई कहलाता है

63

राजदरबार में पद व प्रतिष्ठा के अनुसार सामंतों के बैठने की जगह व पंक्ति कहलाती है

64

राजस्थान में किसानों द्वारा खेतों मेंं बनाए जाने वाले परम्परागत झोपड़ीनुमा अवशीतन भंडार गृह कहलाते हैं

65

लहरिया (ओरणा) स्त्रियों द्वारा ओढ़ा जाता है

66

वधू के मामा की ओर से दी जाने वाली पोशाक कहलाती है

67

वह बहुमूल्य वस्त्र जिसमें जरी व कारचोब का काम किया जाता है

68

विवाह के दिनों में प्रात:काल गाए जाने वाले मांगलिक गीतों को कहते हैं

69

विवाह या यज्ञोपवीत संस्कार के समय लड़के-लड़की के ननिहाल से आने वाला उपहार कहलाता है

70

विवाहोपरांत वर-वधू को खिलाया जाने वाला खेल है

71

विशेष अवसरों पर कन्या के पिता द्वारा कन्या व उसके पति के परिवार को दिया जाने वाला वस्त्राभूषण आदि कहलाता है

72

सुथार, कुम्हार, नाई आदि जातियों को वर्षभर के कार्य के बदले किसानों द्वारा दिया जाने वाला अनाज कहलाता है

73

सूर्यास्त से ठीक पूर्व का समय जब गायें जंगल से चरकर लौटती हैं से आशय है

74

अलगोजे से मिलता-जुलता एक वाद्य है

75

आश्रितों को दी जाने वाली विशेष सहायता है