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दूध के ऊपर जमने वाली मलाई को कहते हैं
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दूल्हे-दुल्हन की विवाह की जूतियाँ को राजस्थानी भाषा में कहा जाता है
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पर्दानशीन स्त्रियों के पर्दा करने का वस्त्र है
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पशुओं को भूसी चराने का काष्ठ का उपकरण और खेतों में सामूहिक रूप से परस्पर बिना पारिश्रमिक काम करने की प्रथा है
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पीर-औलियाओं की प्रशंसा में गाया जाने वाला गीत है
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पुत्री की विदाई पर गाये जाने वाला लोकगीत है
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पुरुषों हेतु ऊन का बना वस्त्र जो सर्दी और वर्षा से बचाव हेतु ओढ़ा जाता है
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पूजा के समय विध्न निवारणार्थ चारों और फेंके जाने वाले अभिमंत्रित चावल को कहते हैं
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बंधेज कला द्वारा पाँच रंगों से रंगा साफा कहलाता है
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मृतक के पीछे किया जाने वाला भोज कहलाता है
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याददाश्त के लिए की जाने वाली लिखावट है
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युवराज का छोटा भाई कहलाता है
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राजदरबार में पद व प्रतिष्ठा के अनुसार सामंतों के बैठने की जगह व पंक्ति कहलाती है
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राजस्थान में किसानों द्वारा खेतों मेंं बनाए जाने वाले परम्परागत झोपड़ीनुमा अवशीतन भंडार गृह कहलाते हैं
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लहरिया (ओरणा) स्त्रियों द्वारा ओढ़ा जाता है
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वधू के मामा की ओर से दी जाने वाली पोशाक कहलाती है
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वह बहुमूल्य वस्त्र जिसमें जरी व कारचोब का काम किया जाता है
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विवाह के दिनों में प्रात:काल गाए जाने वाले मांगलिक गीतों को कहते हैं
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विवाह या यज्ञोपवीत संस्कार के समय लड़के-लड़की के ननिहाल से आने वाला उपहार कहलाता है
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विवाहोपरांत वर-वधू को खिलाया जाने वाला खेल है
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विशेष अवसरों पर कन्या के पिता द्वारा कन्या व उसके पति के परिवार को दिया जाने वाला वस्त्राभूषण आदि कहलाता है
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सुथार, कुम्हार, नाई आदि जातियों को वर्षभर के कार्य के बदले किसानों द्वारा दिया जाने वाला अनाज कहलाता है
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सूर्यास्त से ठीक पूर्व का समय जब गायें जंगल से चरकर लौटती हैं से आशय है
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अलगोजे से मिलता-जुलता एक वाद्य है
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आश्रितों को दी जाने वाली विशेष सहायता है