पेज 3 / 8
51
भोपों द्वारा चित्रित कथा के समक्ष खड़े होकर नृत्य व गायन करना कहलाता है
52
मुगल व दक्षिण शैली से प्रभावित है
53
मेवाड़ स्कूल की देवगढ़ शैली में अत्यधिक प्रयोग हुआ है
54
राजस्थान का मोलेला गाँव प्रसिद्ध है
उत्तर
टेराकोटा हस्तकला के लिए
55
राजस्थान का वह क्षेत्र जो लकड़ी की दस्तकारी और शिल्प कौशल का एक बड़ा केन्द्र रहा है
56
राजस्थान का वह घराना जिसने मीनाकारी को प्रोत्साहित किया
57
राजस्थान का वह जिला जिसकी मेंहदी सर्वाधिक प्रसिद्ध है
58
राजस्थान की लोककला में प्रचलित ‘हीड़’ है
उत्तर
मिट्टी का बना हुआ एक पात्र
59
राजस्थान की सबसे प्राचीन चित्रकला शैली है
60
राजस्थान में मेघवाल जाति की महिलाएँ निपुण होती थीं
61
राजस्थान ललित कला अकादमी स्थापित है
62
राजस्थानी चित्रकला के प्रधान विषय से संबंधित हैं
उत्तर
राग रागिनी, बारहमासा और नायक नायिका भेद विषय
63
रामदेवजी देवता की पड़ गायी जाती है
उत्तर
कामड़ जाति के भोपों द्वारा
64
रावणहत्था वाद्ययंत्र के साथ पड़ गाते हैं
65
सबसे अधिक चित्रांकन एवं सबसे लम्बी गाथा मिलती है
उत्तर
देवनारायणजी की पड़ में
66
सबसे लोकप्रिय पड़ है
67
साँझी की माता माना जाता है
68
सूरसागर, पृथ्वीराज रासो, सारंगधर, रसिक प्रिया, रामायण व महाभारत आदि चित्रों का चित्रांकन हुआ है
उत्तर
महाराणा जयसिंह के समय में
69
‘ओध निर्युक्ति वृत्ति’ एवं ‘दस वैकालिका सूत्र चूर्णि’ नामक राजस्थान के सर्वाधिक प्राचीन उपलब्ध चित्रित ग्रंथ प्राप्त किये गये
70
‘बादला’ नामक पानी का बर्तन प्रसिद्ध है
71
1605 मेवाड़ चित्रकला शैली के स्वर्ण युग (महाराणा जगतसिंह प्रथम के समय) में इस शैली के प्रमुख चितेरे थे
72
अजन्ता शैली एवं स्थानीय शैली के समन्वय से मारवाड़ शैली को जन्म देने वाले चित्रकार हैं
73
आदमकद और बड़े-बड़े पोट्रेट व भित्ति चित्रण की परम्परा विशिष्ट देन है
उत्तर
जयपुर चित्र शैली की
74
आमेर शैली का प्रारम्भिक चित्रित ग्रंथ है
75
कठपुतलियां सामान्यत: बनाई जाती है