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राजस्थान की तमाशा लोक नृत्य शैली के कलाकार हैं
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राजस्थान के प्रसिद्ध पखावज वाद जिन्हें भारत सरकार पद्मश्री से नवाज चुकी है
उत्तर
पंडित पुरुषोत्तम दास
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राजस्थान में लोकनाट्य की सबसे लोकप्रिय विधा है
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लोकप्रिय ‘अग्नि नृत्य’ का प्रारंभ एवं आयोजन मुख्यत: किया जाता है
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वह नृत्य जिसमें कलात्मक अदाकारियाँ प्रस्तुत की जाती है
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वह वाद्य यंत्र जो आधे कटे नारियल की कटोरी पर खाल मढ़कर बनाया जाता है
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वह शास्त्रीय नृत्य जिसकी उत्पत्ति का सम्बन्ध राजस्थान से है
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विवाह के अवसर पर गणपति स्थापना के पश्चात् रात्रि को गरासिया पुरुषों द्वारा किया जाने वाला नृत्य है
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संवत्सरी का दूसरा नाम है
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सरगड़ों का खानदानी वाद्य है
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सहरिया जाति का प्रमुख नृत्य है
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सहरिया जाति की महिलाओं का नृत्य है
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सादी, आड़ी, मांयली, बाहरली तथा बैठक चालों का प्रयोग किया जाता है
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सिरोही क्षेत्र के गरासियों एवं मेवाड़ के जोगियों द्वारा दो छोटी छोटी लकड़ी की डंडियों की सहायता से बजाया जाने वाला वाद्य है
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सुषिर वाद्य है
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हाड़ौती क्षेत्र में प्रचलित लोक नाट्य है
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होली के पर्व से संबंधित नृत्य है
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‘कामायचा’ का संबंध है
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‘केसरिया बालम आओ नी पधारों म्हारे देश’ को अल्लाह जिल्लाह बाई ने गाया
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‘सारंग’ संगीत गाया जाता है
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इंडोणी, शंकरिया, पणिहारी, बागड़िया नृत्य हैं
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कंजर जाति का प्रमुख नृत्य है
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कंजर जाति का प्रमुख नृत्य है
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कच्छी घोड़ी नृत्य करते हैं
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कहरवा ताल पर किया जाने वाला प्रमुख नृत्य है