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खंडित प्रतिमा के रूप में पूज्य हैं
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गोठ मांगलोद स्थान से संबंध है
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चेचक की देवी, सैढ़ल माता व महामाई के नाम से प्रसिद्ध लोक देवी हैं
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चौथमाता का मंदिर स्थित है
उत्तर
सवाईमाधोपुर जिले में
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चौहान वंश की कुलदेवी हैं
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चौहान वंश की कुलदेवी हैं
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जमुवाय माता का प्राचीन नाम था
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जालौर के सोनगरा चौहान शासकों की कुलदेवी थीं
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जीणमाता के सीकर स्थित अष्टभुजी प्रतिमा वाले मंदिर का निर्माण करवाया था
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जैसलमेर के भाटी शासकों की कुल देवी थी
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जोधपुर रियासत की कुल देवी थी
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थार की वैष्णो देवी कहा जाता है
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दादूजी के शिष्य जिसने अपनी रचना ‘भक्तमाल’ में दादू के बावन शिष्यों का नामोल्लेख किया है
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देशनोक में करणीमाता के मंदिर में ‘सफेद चूहे’ के दर्शन को शुभ माना जाता है, इस सफेद चूहे को कहा जाता है
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दौसा की वह देवी जिनकी मान्यता बाल रोगों के निदान हेतु है
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नाथद्वारा मन्दिर में स्थित श्रीनाथजी की मूर्ति लाई गई थी
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प्राचीन तान्त्रिक शक्ति पीठ ‘सुंधा माता’ का मंदिर स्थित है
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बेणेश्वर धाम की स्थापना करवाई
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भक्तिमती मीरा के पति थे
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मेवाड़ के सिसोदिया वंश की कुल देवी थी
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मोदरां माता या महादेवी माता के नाम से जानी जाने वाली लोकदेवी हैं
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राजसमंद झील की पाल बांधने का श्रेय दिया जाता है
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राजस्थान की प्रसिद्ध कृष्ण भक्त मीरा का जन्म का नाम था
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राजस्थान में दधिमाता का मंदिर स्थित है
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राजस्थान में ‘छींक माता’ का मंदिर स्थित है