राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली
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726
ऋण के बदले रेहन रखी हुई भूमि, जायदाद या वस्तु से आशय है
उत्तर
भोगळाऊ
727
कर जमा कराने की रसीद पर लिया जाने वाला कर कहलाता है
उत्तर
अखराई
728
कलाकारों का विवरण रखने वाला विभाग है
उत्तर
गुणीजनखानौ
729
कृषि भूमि को कुछ समय पड़ा रखने की क्रिया कहलाती है
उत्तर
रोलड़/पड़त रखना
730
खाने हेतु उबाले हुए गेहूँ कहलाते हैं
उत्तर
घूगरी
731
खेतों में पानी भरने के लिए क्यारियाँ बनाने का उपकरण कहलाता है
उत्तर
दंताळी
732
गाँव या मुहल्ले की चौपाल को कहते हैं
उत्तर
रहांण
733
चरणोत, छापर, कांकड़, राँकड़, झांखड़, बीड़ आदि हैं
उत्तर
खेतों के प्रकार
734
तोरण पर आए दूल्हे का स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला स्वागत कहलाता है
उत्तर
परछन
735
थरपणौ से आशय है
उत्तर
स्थापित करना
736
दूध दुहते समय गाय के पैर बाँधने की रस्सी कहलाती है
उत्तर
नेतरौ
737
नया भर्ती किया गया सिपाही कहलाता है
उत्तर
रंगरूट
738
परगने में शान्ति व्यवस्था, न्याय एवं भू-राजस्व संबंधी कार्य करने वाला अधिकारी था
उत्तर
हाकिम
739
पीतल या लोहे का बना छोटा लट्टू, जिसको रस्सी के एक छोर पर बाँधकर दीवार की सीध देखने के काम लिया जाता है, कहलाता है
उत्तर
सोल, स्वावळ, सोळ/सावळ
740
पुस्तक रखने का एक आधार या स्टैण्ड है
उत्तर
रहळ
741
फसल के साथ उगने वाली घास कहलाती है
उत्तर
अलसोट
742
बच्चों का खेल है
उत्तर
सतोलिया
743
बाल विवाह होने के बाद जब वधू वयस्क होने पर पीहर से दुबारा ससुराल आती है, तब वर व उसके भाई/बंधुओं को गहने, कपड़े, मिठाई आदि भेजे जाते हैं, यह प्रथा कहलाती है
उत्तर
मुकलावा
744
बेसन आदि की जमाई हुई चक्की (मिठाई) है
उत्तर
मूंगथाळ
745
बैलों के गले में बाँधने की एक रस्सी है
उत्तर
कडळी
746
भार लादने की गाड़ी विशेष है
उत्तर
हरडू
747
भू-राजस्व की कर प्रणाली है
उत्तर
भोग, हांसिल और भौम
748
मकर संक्रांति के दिन किया जाने वाला विभिन्न प्रकार की तेरह तेरह वस्तुओं का कन्याओं को दान, कहलाता है
उत्तर
तेरुंडौ
749
मकान की छत पर चूने आदि का कुटाई कर किया जाने वाला प्लास्टर कहलाता है