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751
मालगुजारी वसूल करने वाला कर्मचारी कहलाता है
752
मुसलमान फकीरों का निवास स्थान कहलाता है
753
रथ, हाथी, घोड़े व पैदल चारों अंगों से पूर्ण सेना कहलाती है
754
राजा-महाराजाओं द्वारा दिया जाने वाला सम्मान है
755
रियासती काल में ओल से तात्पर्य था
उत्तर
सामन्तों के बैठने का स्थान
756
लंबे हाथ बढ़कर परस्पर मिलने की क्रिया या भाव है
757
लांपा, सातरवाड़ा, हुक्का भरने जाना, फूल चुगना, पानीवाड़ा आदि है
उत्तर
मृत्यु के बाद पूर्ण की जाने वाली रस्में
758
वर-वधू के ननिहाल वालों की तरफ से दिए जाने वाला वस्त्राभूषण है
759
वह नाली जिसमें होकर छत का पानी नीचे गिरता है कहलाती है
760
वियोग में गाया जाने वाला गीत है
761
विवाह के समय दिया जाने वाला बड़ा भोज है
762
वे सामन्त जो राजा के अधिक समीप सम्बन्धी होते थे तथा इनकी तीन पीढ़ियाँ रेख, चाकरी तथा हुम्मनामा करों से मुक्त रखी जाती थी, वे थे
763
श्राद्ध, तर्पण आदि करते समय अनामिका (अंगुली) में पहनने की पवित्री को कहते हैं
764
सतीत्व की रक्षा के लिए महिलाओं द्वारा अपने आप को अग्नि को समर्पित करना कहलाता है
765
सर्दी से बचाव हेतु कान पर डाला जाने वाला वस्त्र है
766
सामन्त की मृत्यु पर उसके पुत्र द्वारा जागीर का भार सम्भालने के बदले दी गई लाग कहलाती थी
767
सूर्य पूजा के दिन प्रसूता हेतु बनाया गया विभिन्न सब्जियों का मिश्रण है
768
स्त्रियों का आभूषण है
769
हाथी बाँधने का स्थान कहलाता है
770
होली जलाने के लिए प्रत्येक घर से डाला जाने वाला लकड़ी का डंडा कहलाता है
771
8वीं से 12वीं सदी के समाज में राजस्थान में प्रचलित अधिकारी ‘अक्षपटलिक’ का सम्बन्ध था
उत्तर
राज्य में आय व्यय का ब्यौरा रखने वाले अधिकारी से
772
अक्कड़-बक्कड़, कांजीदड़ौ, दड़ीमार, कौयड़ौ आदि हैं
उत्तर
राजस्थान के देशी खेल
773
अस्तबल की सफाई करने वाला व्यक्ति कहलाता है
774
गन्ना और ज्वार के पौधे का मीठा बंडल कहलाता है
775
गळपटियौ, गळप्रोत और गळबंध हैं