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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान के प्रमुख रीति-रिवाज, प्रथाएँ, परम्पराएँ, वेशभूषा, आभूषण एवं शब्दावली

788 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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76

ऐसे स्थान परर बना खाना, कुण्ड आदि जिसमें चारा चराया जाता है, कहलाता है

77

कुएँ की मोट के रस्से से जुड़ा लकड़ी का एक उपकरण है

78

कुएँ के ऊपर अंदर की ओर बना एक भाग है

79

कुएँ के पास बना मवेशियों के पानी पीने का एक छोटा कुण्ड है

80

कुएँ से रहट या लाव चड़स से सिंचाई से संबंधित शब्द हैं

81

खलिहान में अनाज साफ करने पर अवशिष्ट रहा अनाज व भूसा कहलाता है

82

खलिहान में अन्न की राशि पर चिह्न लगाने की क्रिया कहलाती है

83

खलिहान में पड़ा साफ अनाज का लम्बा ढेर कहलाता है

84

गाजे-बाजे के साथ शव की क्रिया व उपकरण है

85

ग्रामीण स्त्रियों के अधोवस्त्र पर बाँधने का एक प्रकार का डोरा है

86

जमीन का नपाई कहलाती है

87

जिस मकान के चारों ओर खुले बरामदे हों, वह कहलाता है

88

ज्वार का सूखा पौधा, जिस पर से अनाज की बाल काट दी गई हो व जो जानवरों का चारा है, उसे कहते हैं

89

डिंगल का ऐतिहासिक काव्य है

90

दूल्हे की घोड़ी की लगाम पकड़ने का नेग है

91

नमाज पढ़ने से पूर्व शुद्धि के लिए हाथ-पाँव धोने की क्रिया को कहते हैं

92

नामज पढ़ते समय बिछाने का वस्त्र है

93

नींबूड़ौ, मोरियौ, रसियौ आदि हैं

94

पाणिग्रहण संस्कार के बाद कुलगुरु को दिया जाने वाला द्रव्य कहलाता है

95

पुरुषों के सिर का आभूषण है

96

पुष्पों का सेहरा, जो दुल्हन या दूल्हे को धारण कराया जाता है, कहलाता है

97

बिना पारिश्रमिक दिए श्रम कराने की एक प्राचीन प्रथा है

98

भांग मिलाकर तैयार की गई ठंडाई को कहते हैं

99

भील जनजाति में ‘कछावू’ पहनती हैं

100

मकान की पट्टियाँ चढ़ाने के लिए बल्ली-फंटों से बनाया गया रास्ता/मचान कहलाता है