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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान : कलाएँ, चित्रकलाएँ एवं हस्तशिल्प

196 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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कलाप्रेमी महाराजा ईश्वरी सिंह सम्बन्धित हैं

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किशनगढ़ शैली का प्रवर्तक माना जाता है

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कोटा-बूँदी चित्र शैली में बहुतायत से चित्रांकन हुआ है

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चित्रकला शैली जिसका जन्म जयपुर एवं मुगल शैली के मिश्रण से हुआ

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जैसलमेर शैली का प्रमुख चित्र है

81

थापों के साथ पशु-पक्षी के चित्र अंकित करने की भी प्रथा है

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देवीलाल सामर ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलवाई

83

पिछवाईयों के चित्रण का मुख्य विषय है

84

पड़ चित्रशैली में विशेष रूप से प्रयोग होता है

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पड़ चित्रित करने वालों को कहा जाता है

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पड़ फट जाने या खराब हो जाने पर पड़ का पवित्र जल में विसर्जन कहलाता है

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बूँदी तथा मुगल शैली का सामंजस्य प्रकट करने वाली चित्रकला शैली थी

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ब्ल्यू पॉटरी के पर्याय माने जाते हैं

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भवन निर्माण करने वाले शिल्पी जो भित्ति चित्र भी करते हैं, कहलाते हैं

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भित्ति चित्रांकन की दृष्टि से राजस्थान का सर्वाधिक विस्तृत क्षेत्र रहा है

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मथैरण व उस्ता कलाकारों ने पल्लिवित और पुष्पित किया

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महारावल हरराज, अखैसिंह व मूलराज मुख्य संरक्षक थे

93

मारवाड़ स्कूल की मौलिकता को प्रदर्शित करने वाला प्राचीनतम चित्र है

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मारवाड़ स्कूल की वह शैली जिसमें जैन ग्रंथों के लेखन व चित्रण का कार्य सर्वाधिक हुआ है

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मेवाड़ की चित्रकला शैली का स्वर्णकाल माना गया है

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मेवाड़ चित्रकला शैली पर मुगल प्रभाव आने लगा

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राजस्थान के कलाकार जिसने पड़ शैली में एक नए प्रयोग के तहत पारम्परिक राजस्थानी लोक गाथाओं के स्थान पर महत्वपूर्ण पौराणिक आख्यानों का चित्रण किया है

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राजस्थान में हस्तशिल्प डिजाइन एवं विकास केन्द्र स्थित है

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राजस्थानी लोक कला पड़ चित्रण कला की अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार हैं

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राज्य की हाड़ौती चित्र शैली में प्रयोग शुरू हुआ था