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गणगौर के अवसर पर गरासियों द्वारा किया जाने वाला सामूहिक नृत्य है
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गरासिया जनजाति का नृत्य है
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घूमर-घूमरा नृत्य सर्वाधिक प्रचलित है
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चकरी व धाकड़ नृत्य संबंधित है
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चांचोड़ा गांव की युवतियां पारंगत मानी जाती हैं
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चांचोड़ा गांव स्थित है
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जयपुर का डागर घराना है
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जैन जाति के बालकों द्वारा किया जाता है
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झालावाड़ राज्य का वह शासक जो कला एवं संगीत का महान आश्रयदाता सिद्ध हुआ
उत्तर
महाराजा राणा भवानी सिंह
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ढोलक और मंजीरा वाद्य यंत्रों की आवश्यकता होती है
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तारों से बजाया जाने वाला तत् वाद्य नहीं है
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तेरहताली नृत्य करते समय जो जोत की जाती है तथा मुंह में तलवार रखी जाती है वह प्रतीक मानी जाती है
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तेरहताली नृत्य का प्रमुख वाद्य है
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दिल्ली संगीत घराने के प्रवर्तक सदारंग जयपुर संगीत घराने के प्रवर्तक मनरंग के थे
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नाटिका के रूप में मंचित किया जाता है
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पुराने समय में यद्ध के समय बजाया जाता था
उत्तर
बिगुल, तुरही एवं करणा वाद्य
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प्रसिद्ध सितार वादक जसकरण गोस्वामी का जन्म हुआ था
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बच्चा होने के बाद सूरज पूजन के समय गाया जाने वाला लोकगीत है
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बलेदी-बलेदी नृत्य किया जाता है
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भगतण नृत्य अधिक प्रचलित है
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भारत में ‘चारबैंत कला’ का प्रवर्तक माना जाता है
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भारतीय कठपुतली कला को विश्व मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने का श्रेय दिया जाता है
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भीलों का प्रसिद्ध लोकगीत जिसे स्त्री-पुरुष साथ मिलकर गाते हैं
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मटका नृत्य कहलाता है
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मारवाड़ के जोगियों द्वारा गोपीचन्द्र भर्तृहरि, निहालदे आदि के ख्याल गाते समय प्रयोग किया जाता है
उत्तर
अलगोजा वाद्य यंत्र का