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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान : संगीत, नृत्य, नाट्य एवं वाद्ययंत्र

227 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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76

गणगौर के अवसर पर गरासियों द्वारा किया जाने वाला सामूहिक नृत्य है

77

गरासिया जनजाति का नृत्य है

78

घूमर-घूमरा नृत्य सर्वाधिक प्रचलित है

79

चकरी व धाकड़ नृत्य संबंधित है

80

चांचोड़ा गांव की युवतियां पारंगत मानी जाती हैं

81

चांचोड़ा गांव स्थित है

82

जयपुर का डागर घराना है

83

जैन जाति के बालकों द्वारा किया जाता है

84

झालावाड़ राज्य का वह शासक जो कला एवं संगीत का महान आश्रयदाता सिद्ध हुआ

85

ढोलक और मंजीरा वाद्य यंत्रों की आवश्यकता होती है

86

तारों से बजाया जाने वाला तत् वाद्य नहीं है

87

तेरहताली नृत्य करते समय जो जोत की जाती है तथा मुंह में तलवार रखी जाती है वह प्रतीक मानी जाती है

88

तेरहताली नृत्य का प्रमुख वाद्य है

89

दिल्ली संगीत घराने के प्रवर्तक सदारंग जयपुर संगीत घराने के प्रवर्तक मनरंग के थे

90

नाटिका के रूप में मंचित किया जाता है

91

पुराने समय में यद्ध के समय बजाया जाता था

92

प्रसिद्ध सितार वादक जसकरण गोस्वामी का जन्म हुआ था

93

बच्चा होने के बाद सूरज पूजन के समय गाया जाने वाला लोकगीत है

94

बलेदी-बलेदी नृत्य किया जाता है

95

भगतण नृत्य अधिक प्रचलित है

96

भारत में ‘चारबैंत कला’ का प्रवर्तक माना जाता है

97

भारतीय कठपुतली कला को विश्व मंच पर प्रतिष्ठा दिलाने का श्रेय दिया जाता है

98

भीलों का प्रसिद्ध लोकगीत जिसे स्त्री-पुरुष साथ मिलकर गाते हैं

99

मटका नृत्य कहलाता है

100

मारवाड़ के जोगियों द्वारा गोपीचन्द्र भर्तृहरि, निहालदे आदि के ख्याल गाते समय प्रयोग किया जाता है