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अजयमेरु दुर्ग या गढ़बीठली का नाम ‘तारागढ़’ रखा
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अपनी मारक क्षमता हेतु प्रसिद्ध अष्टधातु निर्मित ‘शारदा तोप’ स्थित है
उत्तर
खण्डार के दुर्ग में
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अपने संकीर्ण गलियारों के लिए प्रसिद्ध दुर्ग है
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अरावली पर्वतमाला में स्थित नहीं है
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अलवर स्थित राजगढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया
81
ऐसा दुर्ग जिसके चारों तरफ दूर-दूर तक मरूभूमि हो, कहलाता है
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किले की प्राचीर पर हमला करने के लिए रेत और अन्य वस्तुओं से बनाए जाने वाले ऊँचे चबूतरे को कहते थे
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खींवल माता का मंदिर स्थित है
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जयपुर शहर के किले में रखा गया है
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जालौर के किले को कहते हैं
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जैसलमेर में ‘पाँच पटवाा हवेलियों’ का निर्माण करवाया
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जोधपुर थार के रेगिस्तान का प्रवेश द्वार है। जोधपुर का नयनाभिराम शीश मुकुट जिसका निर्माण राठौड़ वंशीय राव जोधा ने सन् में कराया, कहते हैं
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तारागढ़ अथवा अजयमेरू दुर्ग को ‘दूसरा जिब्राल्टर’ नाम दिया
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तारागढ़ की घाटी मेंं ‘चश्मेनूर’ महल बनवाया
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तिमनगढ़ दुर्ग पर आक्रमण किया था
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दक्षिणी राजस्थान में स्थित दुर्ग है
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नाहरगढ़ दुर्ग में एकसमान नौ महलों का निर्माण करवाया था
उत्तर
माधोसिंह द्वितीय ने
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पगड़ी नीचे गिर जाती है’
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पीर शेख मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार है
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फरिश्ते, परियों और देवताओं की करामातों से बना दुर्ग, श्री रूडवार्ड किपलिंग द्वारा कहा गया है
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बादल विलास, गज विलास व अपने महलों में पत्थर पर बारीक खुदाई एवं कलात्मक जालियों के लिए विश्व में प्रसिद्ध किला है
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बाड़मेर जिले में स्थित है
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बीठली पहाड़ी पर स्थित है
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बूंदी स्थित तारागढ़ के किले का निर्माण करवाया
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भामती पहाड़ी पर स्थित है