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वह प्रतिहार राजा जिसके काल में प्रसिद्ध ग्वालियर प्रशस्ति की रचना की गई
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वह मुगल शासक जिसने निखात निधि नाम के सिक्के जारी किये
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वह शिलालेख जिसका रचयिता जैता नामक जैन मुनि था
उत्तर
बीकानेर की प्रशस्ति
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वह शिलालेख जिसमें धवल नामक मौर्यवंशी राजा का उल्लेख है
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वह शिलालेख जिससे ज्ञात होता है कि द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व में भागवत धर्म का प्रचार, वासुदेव तथा संकर्षण की मान्यता और अश्वमेध यज्ञ का प्रचलन था
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वह शिलालेख जो गुहिल शासक शिलादित्य के समय का है
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वह संग्रहालय जिसकी मुख्य विशेषता फतह प्रकाश महल है
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श्री बांगड़ राजकीय संग्रहालय स्थित है
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सतसई पर बने चित्र प्रदर्शित हैं
उत्तर
दिलाराम बाग संग्रहालय में
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सिन्धु घाटी सभ्यता से लेकर गुप्त वंश तक के नमूनों का संग्रह है
उत्तर
बीकानेर म्यूजियम में
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‘मारवाड़ रा परगना री विगत’ ग्रंथ लिखा है
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‘मुण्डियार री ख्यात’ का विषय है
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‘शिुशुपाल वधम्’ संस्कृत महाकाव्य के रचयिता महाकवि माघ का निवास स्थान था
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अंकित है, जो तीर एवं तरकश से युक्त है, प्राप्त हुई है
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अंगे्रजी भाषा में लिखी ‘हिस्ट्री ऑफ दी राठौड्स’ कृति है
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अनाड़ सिंह जिन्होंने सिक्कों पर अपना नाम ‘रा’ अंकित किया, वह मुखिया थे
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अपराजित के शिलालेख के रचयिता हैं
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आर्थूणा का शिव मंदिर जो पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, स्थित है
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आहत् मुद्राओं पर मुख्यत: अंकित होते थे
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करौली राज्य में सर्वप्रथम सिक्के ढालने का श्रेय प्राप्त है
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किशनगढ़ पेंटिंग्स पुस्तक के लेखक हैं
उत्तर
कार्ल खण्डालवाला तथा एरिक डिक्सन
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कुम्भलगढ़ का वह मंदिर जिसको अब मामादेव मंदिर कहते हैं
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गधियाशाही मुद्रा का प्रचलन था
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गलीचा प्रदर्शित है
उत्तर
अल्बर्ट म्यूजियम में
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गुप्तकालीन सोने के सिक्के प्राप्त हुए