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राजस्थान की कला एवं संस्कृति

राजस्थान : संगीत, नृत्य, नाट्य एवं वाद्ययंत्र

227 प्रश्न उपलब्ध हैं। उत्तर पढ़ने के लिए बटन दबाएँ।

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101

मारवाड़ में पाई जाने वाली गायक जाति कानगूजरी का प्रमुख वाद्य है

102

मावलिया व होली नृत्य संबंधित है

103

मिरासी जाति के लोग, जिनका मुख्य पेशा सारंगी वादन रहा है, वे रहते हैं

104

मुँह से बजाया जाने वाला वाद्य यंत्र है

105

मेवाड़ के महाराणा जिन्होंने संगीत पर ग्रंथ लिखे थे

106

मोर-मोरनी नृत्य प्रसिद्ध है

107

राजस्थान का एकमात्र ऐसा लोकवाद्य जिसकी डोटी में तनाव के लिए पखावज की तरह लकड़ी के गुटके डाले जाते हैं

108

राजस्थान का प्रमुख लोकनृत्य है

109

राजस्थान का राज्य वाद्य है

110

राजस्थान का वह लोक वाद्य जिसको ज्यूज हार्प भी कहा जाता है

111

राजस्थान की माँड गायन शैली से जुड़ी हुई हैं

112

राजस्थान के उमर फारुख मेवाती का सम्बन्ध था

113

राजस्थान में भील जनजाति का अभिलाक्षणिक नृत्य एवं राजपूत महिलाओं का सामुदायिक नृत्य है

114

राजस्थान में ‘लोकनृत्यों का सिरमौर’ कहा जाता है

115

रावल जाति द्वारा किया जाने वाला नृत्य है

116

रोहिड़ा नृत्य का प्रचलन है

117

लोक नृत्य की भवाई शैली से संबंधित था

118

लड़की की विदाई के अवसर पर किया जाता है

119

वागड़ क्षेत्र में प्रचलित घूमर-घूमरा नृत्य ब्राह्मण जाति में किया जाता है

120

वाद्य यंत्र ‘टामक’ का संबंध है

121

सामरजी तथा दयाराम का सम्बन्ध है

122

सामाजिक व धार्मिक लोकनृत्य के अन्तर्गत आता है

123

सिरोही का प्रसिद्ध नृत्य है

124

स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला तेरहताली नृत्य किया जाता है

125

‘म्हारौ बरसाले री मूमल, हालैनी ऐ आलीजे रे देख’ नामक लोकगीत है