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गुर्जर प्रतिहार वंश के शासक जिसने चाँदी के दम्म नामक सिक्के चलाये
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चित्तौड़गढ़ जिले से प्राप्त हुआ है
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चौहान वंश के इतिहास की जानकारी का महत्वपूर्ण साधन है
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जीवाधर की कृति है
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डोडिया तथा अखैशाही सिक्के का प्रचलन था
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ढब्बूशाही, विजयशाही एवं भीमशाही सिक्कों का प्रचलन था
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निशान होने से वह रुपया कहलाता था
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प्रतापगढ़ राज्य से सम्बन्धित सिक्का है
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प्राचीनकाल में आहत् सिक्के (पंचमार्क) सिक्कों का प्रचलन था
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प्राचीनतम सिक्के कहलाते हैं
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प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका रही थी
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बारह राशियों वाले सिक्के जारी किये
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बैराठ के उत्खनन में इण्डो-ग्रीक मुद्राएँ प्राप्त हुई हैं
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मानमोरी के लेख के रचयिता थे
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मारवाड़ में आदिवराह सिक्कों का प्रचलन प्रारम्भ किया
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मूमल, बगड़ावत एवं पाबूजी री बात, ये सभी रचनाएँ हैं
उत्तर
लक्ष्मीकुमारी चूण्डावत की
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मेवाड़ राज्य से प्राप्त ताँबे के सिक्कों को कहा जाता था
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मौर्य, कुषाण, गुप्त आदि के समय के सिक्के कहलाते थे
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राजकीय संग्रहालय कोटा की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान रहा
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राजरूपक के लेखक हैं
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राजस्थान के उत्तरी तथा पश्चिमी क्षेत्र से प्राप्त किये गये
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राजस्थान के उदयपुर राज्य से सम्बन्ध था
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राजस्थान में बुचकला व घटियाला के शिलालेख प्राप्त हुए हैं
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लक्ष्मणशाही सिक्कों का प्रचलन था
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वह इंजीनियर जिनकी देखरेख में जयपुर का अल्बर्ट हॉल म्यूजियम निर्मित हुआ