पेज 6 / 7
126
भेड़, ऊँट, गाय, भैंस, सुअर और बकरी पशुओं का पालन किया गया था
उत्तर
कालीबंगा के निवासियों द्वारा
127
मकानों से पानी निकालने की वैज्ञानिक पद्धति ‘चक्रकूप’ विशेषता थी
128
मध्य पाषाण कालीन सूक्ष्म हथियार राजस्थान में प्राप्त किये गये हैं
उत्तर
चित्तौड़ एवं विराटनगर से
129
रंगमहल (हनुमानगढ़) की खुदाई का कार्य हुआ था
उत्तर
डॉ. हन्नारिड़ के नेतृत्व में
130
राजस्थान का वह प्रसिद्ध पुरास्थल जो उसी नदी के किनारे स्थित था, जिसके किनारे प्राचीन काल में ऋग्वेद की रचना हुई थी
131
राजस्थान की वह नदियाँ जो प्रस्तर युगीन मानव के निवास से संबंध रखती हैं
132
राजस्थान की सर्वाधिक प्राचीन सभ्यता के चिह्न मिले हैं
उत्तर
दृषद्वती तथा सरस्वती नदियों की घाटी में
133
राजस्थान के बागोर, तिलवाड़ा, भरनी और भैंससरोड़गढ़ व नवाघाट से अवशेष प्राप्त हुए हैं
उत्तर
नव पाषाण काल (उत्तर पाषाण काल) के
134
राजस्थान में पुरापाषाण काल की हैण्डएक्स (हाथ कुठार) संस्कृति के अवशेष प्राप्त हुए हैं
उत्तर
विराट नगर, भानगढ़, ढिगारिया से
135
राजस्थान में विभिन्न स्थलों से प्राप्त प्रागैतिहासिक काल के शैल चित्रों में बहुलता है
136
लकड़ी को कुरेदकर नाली बनाने के लिए एकमात्र अवशेष प्राप्त हुए हैं
137
वह इतिहासवेत्ता जिसने कालीबंगा को सिन्धु घाटी साम्राज्य की तृतीय राजधानी कहा है
138
वह पुरातात्विक स्थल जहाँ से उत्खनन में प्राप्त अवशेषों में 7वीं सदी ई. पूर्व से लेकर दूसरी सदी तक की सभ्यताओं के प्रमाण प्राप्त हुए हैं
139
वह सभ्यता जिसका संबंध ईरान से माना जाता है
140
वह स्थल जिसको ‘धूलकोट’ भी कहा जाता है
141
वह स्थान जहाँ से गुप्तकालीन कला के अवशेष एवं शिवि जनपद के सिक्के मिले हैं
142
शुंगकालीन तीखे किनारे वाले प्याले प्राप्त किये गये
उत्तर
पुरातात्विक स्थल लाछूरा से
143
सलेटी रंग की चित्रित मृद्भाण्ड सभ्यता से राजस्थान के संबंधित स्थल हैं
उत्तर
नोह, जोधपुर, विराटनगर एवं सुनारी
144
सात अग्निवेदिकाएँ प्राप्त हुई हैं
उत्तर
कालीबंगा क्षेत्र से
145
सौंथी स्थल जो पुरातात्विक महत्व रखता है, स्थित है
146
‘मुण्डियार री ख्यात’ का विषय है
147
प्राप्त अवशेषों के आधार पर राजस्थान का वह पुरातात्विक स्थल जहाँ पर लोहे के उपकरण बनाने का एक बड़ा केन्द्र होने का अनुमान लगाया गया है
148
बागोर उत्खनन में प्राप्त हुए हैं
149
बागोर के द्वितीय चरण के उत्खनन में प्राप्त हुई
उत्तर
त्रिभुजाकार शास्त्र, सुई एवं कुंताग्र
150
लौह धातु का निष्कर्षण करने वाली भट्टियाँ प्राप्त हुई हैं
उत्तर
जोधपुरा और सुनारी से