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जोधपुर का लोकप्रिय नाम है
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जोधपुर के निकट ओसियाँ के जैन मंदिरों का समूह देन है
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जोधपुर में गुलाब व रानीसागर तालाब का निर्माण करवाया
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जोधपुर में शेखावत जी का तालाब बनवाया था
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डॉ. डी.आर. भण्डारकर ने गुहिलों को उत्पन्न माना है
उत्तर
विप्रवंशीय नागर ब्राह्मण से
131
धरमत के युद्ध में केन्द्रीय सेना का नेतृत्व जसवन्तसिंह के अलावा किया था
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धरमत के युद्ध में पराजित किया था। धरमत स्थित है
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नागौर के समीप ‘चूँडासर’ कस्बा बसाया
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भाद्राजूण किले पर अकबर की सेना का अधिकार हो जाने के बाद राव चन्द्रसेन गये
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मण्डौर में चाँद बावड़ी का निर्माण करवाया
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मराठा सरदार जयप्पा सिंधिया ने जोधपुर पर आक्रमण किया था
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मल्लीनाथ ने चूँडा को जागीर प्रदान की थी
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मारवाड़ में राजस्व के अतिरिक्त किसानों से वसूल किया जाता था
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मुगल बादशाह अकबर की सेना ने जोधपुर के शासक राव चन्द्रसेन को हराकर जोधपुर दुर्ग पर अधिकार किया
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मुस्लिम इतिहासकारों ने जिस राजपूत शासक को ‘हशमत वाला शासक’ कहा है, वह थे
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मुहणौत नैणसी ने मारवाड़ के राठौड़ों को संबंधित माना है
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मेहरानगढ़ में ‘मान पुस्तकालय’ की स्थापना की थी
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राजस्थान का वह प्रान्त जहाँ सामन्तों की चार श्रेणियाँ ‘राजवी’, ‘सरदार’, ‘गनायत’ और ‘मुत्सद्दी’ पायी जाती थी
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राजस्थान के दो शासक मुकुन्दसिंह व सुजानसिंह मारे गये थे
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राजस्थान में नाथ सम्प्रदाय के सबसे बड़े केन्द्र महामंदिर का निर्माण मानसिंह ने करवाया
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राठौड़ों को गहड़वालों से पृथक मानने वाला प्रथम इतिहासकार है
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वह पुस्तक जिससे यह ज्ञात होता है कि शेरशाह ने सुमेल का युद्ध जीतने के बाद कहा कि ‘एक मुट्ठी भर बाजरे के लिए मैं हिन्दुस्तान की बादशाहत खो देता’
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वह मारवाड़ के शासक जिसे राजसिंह ने शरण दी
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श्यामलदास ने अपने ग्रंथ वीर-विनोद में ‘जोधपुर की नूरजहाँ’ के नाम से संबोधित किया है
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साहित्यकार दयालदास सिंढायच ने राठौड़ों की उत्पत्ति मानी है
उत्तर
ब्राह्मण वंश भल्लराव से