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राजस्थान का इतिहास

राठौड़ वंश का इतिहास

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126

जोधपुर का लोकप्रिय नाम है

127

जोधपुर के निकट ओसियाँ के जैन मंदिरों का समूह देन है

128

जोधपुर में गुलाब व रानीसागर तालाब का निर्माण करवाया

129

जोधपुर में शेखावत जी का तालाब बनवाया था

130

डॉ. डी.आर. भण्डारकर ने गुहिलों को उत्पन्न माना है

131

धरमत के युद्ध में केन्द्रीय सेना का नेतृत्व जसवन्तसिंह के अलावा किया था

132

धरमत के युद्ध में पराजित किया था। धरमत स्थित है

133

नागौर के समीप ‘चूँडासर’ कस्बा बसाया

134

भाद्राजूण किले पर अकबर की सेना का अधिकार हो जाने के बाद राव चन्द्रसेन गये

135

मण्डौर में चाँद बावड़ी का निर्माण करवाया

136

मराठा सरदार जयप्पा सिंधिया ने जोधपुर पर आक्रमण किया था

137

मल्लीनाथ ने चूँडा को जागीर प्रदान की थी

138

मारवाड़ में राजस्व के अतिरिक्त किसानों से वसूल किया जाता था

139

मुगल बादशाह अकबर की सेना ने जोधपुर के शासक राव चन्द्रसेन को हराकर जोधपुर दुर्ग पर अधिकार किया

140

मुस्लिम इतिहासकारों ने जिस राजपूत शासक को ‘हशमत वाला शासक’ कहा है, वह थे

141

मुहणौत नैणसी ने मारवाड़ के राठौड़ों को संबंधित माना है

142

मेहरानगढ़ में ‘मान पुस्तकालय’ की स्थापना की थी

143

राजस्थान का वह प्रान्त जहाँ सामन्तों की चार श्रेणियाँ ‘राजवी’, ‘सरदार’, ‘गनायत’ और ‘मुत्सद्दी’ पायी जाती थी

144

राजस्थान के दो शासक मुकुन्दसिंह व सुजानसिंह मारे गये थे

145

राजस्थान में नाथ सम्प्रदाय के सबसे बड़े केन्द्र महामंदिर का निर्माण मानसिंह ने करवाया

146

राठौड़ों को गहड़वालों से पृथक मानने वाला प्रथम इतिहासकार है

147

वह पुस्तक जिससे यह ज्ञात होता है कि शेरशाह ने सुमेल का युद्ध जीतने के बाद कहा कि ‘एक मुट्ठी भर बाजरे के लिए मैं हिन्दुस्तान की बादशाहत खो देता’

148

वह मारवाड़ के शासक जिसे राजसिंह ने शरण दी

149

श्यामलदास ने अपने ग्रंथ वीर-विनोद में ‘जोधपुर की नूरजहाँ’ के नाम से संबोधित किया है

150

साहित्यकार दयालदास सिंढायच ने राठौड़ों की उत्पत्ति मानी है