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सवाई रामसिंह द्वितीय के समय प्रशासन संचालन के लिए गठित रीजेन्सी का प्रथम अध्यक्ष बनाया गया
127
हवामहल में खिड़कियों की संख्या है
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‘बिहारी सतसई’ नामक ग्रन्थ का रचयिता ‘बिहारी’ दरबारी था
उत्तर
मिर्जाराजा जयसिंह का
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1747 दोनों पुत्रों ईश्वरी सिंह व माधोसिंह के मध्य लड़ा गया युद्ध था
130
1748 अब्दाली की फौज को पराजित किया था
उत्तर
सवाई ईश्वरी सिंह ने
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1787 और सवाई प्रतापसिंह के मध्य हुए युद्ध का प्रमुख कारण था
उत्तर
मराठा सेनानायक की धन पिपासा
132
अंग्रेजोें ने ‘जंग बहादुर’ की उपाधि प्रदान की थी
उत्तर
जयपुर शासक रामसिंह द्वितीय को
133
अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया
134
आमेर का राजा जो सर्वाधिक समय तक मुगल सेवा में रहा
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आमेर के राजा मानसिंह का राज्याभिषेक जनवरी, ई.
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आमेर दुर्ग में शिला देवी का मंदिर बनवाया था
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आमेर दुर्ग में ‘जगतशिरोमणी मंदिर’ का निर्माण करवाया था
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कछवाहा वंश का आदि पुरुष माना जाता है
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कछवाहों की प्राचीनतम राजधानी माना जाता है
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काबुल के शासक मिर्जा हकीम खाँ को पराजित किया था
141
जजिया के बदले भोमट परगना मुगलों को नहीं दिया
142
जयपुर की तमाशा लोक नाट्य शैली का प्रादुर्भाव हुआ
उत्तर
आमेर के महाराजा मानसिंह प्रथम के समय
143
जयपुर के उत्तराधिकार संघर्ष में पहला युद्ध था
144
जयपुर के बदनाम शासक के नाम से जाना जाता है
145
जयपुर के शासकों का शाही शमशान घाट कहलाता है
146
जयपुर में हुनरी मदरसा की स्थापना का श्रेय दिया जाता है
147
जयपुर रियासत में डाक टिकट व पोस्ट कार्ड की शुरूआत हुई थी
उत्तर
रामसिंह द्वितीय के समय
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नाहरगढ़ दुर्ग में नौ पासवानों के नाम से एक ही आकार-प्रकार के नौ सुन्दर महल बनाने वाला कछवाहा शासक था
उत्तर
सवाई माधोसिंह द्वितीय
149
बिशनसिंह की मृत्यु के उपरान्त आमेर का शासक बना
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भगवन्त दास की मृत्यु हुई