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जोधपुर शैली, बीकानेर शैली, किशनगढ़ शैली, अजमेर शैली व नागौर उपशैली सम्बन्धित हैं
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डालू नामक चित्रकार संबंधित है
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थेवा कला का केन्द्र है
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देवगढ़ चित्रकला शैली को प्रकाशमान किया
उत्तर
डॉ. श्रीधर अंधारे ने
130
देश की प्रथम पड़ चितेरी महिला हैं
131
नारायणदास, अमरदास, शिवदास व रतनजी भाटी संबंधित हैं
उत्तर
मारवाड़ चित्रकला शैलियों के स्कूल से
132
पशु-पक्षी, फल-फूल-वृक्ष आदि का चित्रण प्रधानत: अधिक व विश्वसनीय हुआ
उत्तर
बूँदी चित्रकला शैली में
133
पिछवाई कलाकृतियों में बने चित्र उद्धृत किये गये हैं
उत्तर
भगवान कृष्ण के जीवन से
134
पिछवाईयों का संबंध है
135
बूँदी चित्र शैली का सर्वाधिक विकास हुआ
उत्तर
राव सुरजन हाड़ा के समय में
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भाटी अमरदास (1800-1830 ई.), दाना भाटी ई.),
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भित्तियों (दीवारों) पर चित्रण को चिरकाल तक जीवित रखने की विशेष आलेखन पद्धति है
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महिला चित्रकार ‘साहिबा’ चित्रकार हैं
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मेवाड़ एवं ब्रज की सांस्कृतिक परम्पराओं के समन्वय से विकास हुआ
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योगासन प्रमुख विषय रहा है
उत्तर
अलवर चित्रकला शैली का
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राजपूत चित्र शैली जिसमें रानियों को भी शिकार करते चित्रित किया गया है
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राजस्थान का वह क्षेत्र जो ‘राजस्थानी चित्रकला शैली’ का प्रमुख केन्द्र रहा है
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राजस्थान का वह जिला जिसमें कल्चर्ड मोती का उत्पादन किया जा रहा है
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राजस्थान की ‘बहरूपिया कला’ को विदेशों में प्रदर्शित किया
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राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में घर की छोटी-मोटी चीजों को सुरक्षित रखने हेतु बनाई गई मिट्टी की महलनुमा चित्रित आकृति कहलाती है
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राजस्थान में सर्वाधिक प्राचीन उपलब्ध चित्रित ग्रंथ मिले हैं
उत्तर
जैसलमेर ग्रंथ भंडार से
147
राजस्थानी लोक चित्र शैली में ‘पाने’ कहते हैं
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राठौड़ राजपूत शाखा के आश्रय से पल्लवन हुआ
उत्तर
मारवाड़ चित्रकला शैली का
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राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली में सुरक्षित ‘रसिक प्रिया’ का अधूरा सैट सम्बन्धित है
उत्तर
बूंदी चित्रकला शैली से
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वह चित्र शैली जिसमें पीला रंग प्रधान रहा